एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव से दुनिया भर में हर साल जाती है 5 लाख लोगों की जान- अध्ययन

Intake Antibiotic Medicines

Intake Antibiotic Medicines : साल 2000-15 में दुनियाभर में एंटीबायोटिक की खपत में 65% बढ़ोतरी भी बढ़ी है

Intake Antibiotic Medicines : जितनी तेजी से दुनिया का मेडिकल सेक्टर विकसित बन रहा हैं उतनी ही तेजी से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल लोगों में बढ़ता जा रहा है.

हाल ही में हुई अंतर्राष्ट्रीय शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले 15 सालों (2000-2015) में दुनियाभर में एंटीबायोटिक दवाओं की खपत 65% तक बढ़ी है.
यही नहीं इस रिपोर्ट के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाओं के पड़ने वाले प्रभाव से हर साल 5 लाख लोगों की मौत भी हो जाती है.
इस बात की पुष्टि की गई है कि इन मौतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित इस्तेमाल है.
आपको बता दें कि एंटीबायोटिक दवाओं से होने वाली मौत के आंकड़ों में यूरोप सहित संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल है.रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक इन दवाओं की बिक्री दुनिया के 76 गरीब देशों में तेजी से हो रही है.
सेंटर फॉर डिज़ीज डायनेमिक्स में अध्ययन के एक लेखक एली क्लेन कहते हैं कि वैश्विक स्तर पर एंटीबायोटिक के उपयोग में नाटकीय वृद्धि देखी जाती है और यह वृद्धि कम और मध्यम आय वाले देशों को अधिक लाभान्वित करती है.
यह भी पढ़ें – सावधान ! अगर आपको डायबिटीज है तो अपनी आंखों की रोशनी बचाने के लिए पढ़ें ये खबर
यानि कहा जा सकता है कि ऐसे देशों के आर्थिक विकास पर निर्भर करता है कि उन तक दवाएं आसानी से पहुंच जाती हैं.
हालांकि आज के युग में एंटीबायोटिक दवाओं की पहुंच आम बात है लेकिन इसके अत्यधिक प्रयोग से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जो चिंताजनक है.
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन बताता है कि औसतन गरीब देश आज भी अमीर देशों की तुलना में ज्यादा एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करते हैं.
कम और मध्यम आय वाले देशों में यह आकंड़ा प्रति 1,000 लोगों की दैनिक खुराक के अनुसार 16 वर्षों में 77% से 7.6 से बढ़कर 13.5 हो गया, वहीं अमीर देशों में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल लगभग दो बार किया जाता है.
बता दें कि अध्ययन के मुताबिक उच्च आय वाले देशों में एंटीबायोटिक दवाओं के लिए खपत की दर औसतन 4% प्रति 1,000 लोगों में 25.7 डोस तक गिर गई है.
अगर हम अपने भारत की बात करें तो एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग 2015 में 3.2 अरब निर्धारित दैनिक खुराक डीडीडी से बढ़कर 6.5 अरब पहुंच गया था.
रिपोर्ट के आंकड़ों में चिंता का विषय यह है कि एंटीबायोटिक खपत को कम करने के लिए बनाई गई नीतियों के बाद भी देशों में इन दवाओं के अति प्रयोग की संख्या विश्व स्तर पर 2030 तक 200% से अधिक हो सकती है.
बता दें कि यह संख्या 2015 में प्रति दिन 42 अरब डोस से 128 अरब रही थी.