जानें Maggi में मिलने वाला Lead कितना खतरनाक था हमारे शरीर के लिए

Nestle Maggi Noodles Lead

Nestle Maggi Noodles Lead : कंपनी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मैगी मे लेड(सीसा) होने की बात स्वीकार कर ली है.

Nestle Maggi Noodles Lead : एक बार फिर लगभग 4 साल बाद मैगी विवाद बाहर आ गया है,इस बार ये मामला सुप्रीम कोर्ट में मैगी कंपनी के वकीलों द्वारा दिए बयान के बाद गरम हुआ है.

दरअसल गुरुवार को कंपनी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मैगी मे लेड(सीसा) होने की बात स्वीकार कर ली है.
जिसके बाद कोर्ट ने मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी के तहत सरकार को आगे की कार्यवाही की इजाजत दे दी है.
कोर्ट ने अपने फैसले में नेस्ले इंडिया के वकीलों से यहां तक की पूछा की कोई बच्चा आपके लेड युक्त मैगी को क्यों खाएं?
Nestle Maggi Noodles Lead
क्या था पूरा मामला
ज्ञात हो साल 2015 में देश के विभिन्न हिस्सों में मैगी के कई नमूने लिए गए थे जिसे टेस्ट करने के दौरान तय मात्रा से ज्यादा लेड मिलने की बात सामने आई थी.
एक दो नहीं बल्कि लगभग हर जगह मैगी में लेड की मात्रा अधिक पाई गई जिसके बाद जून 2015 में सरकार ने इस पर बैन लगा दिया था.
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इसके बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत की थी और 640 करोड़ रुपए का हर्जाना भी मांगा था.
लेकिन नेस्ले इंडिया ने एनसीडीआरसी में चल रहे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसकी सुनवाई में आखिरकार नेस्ले इंडिया ने मान लिया की उस समय मैगी में तय मात्रा से ज्यादा सीसा मैजूद था.
कितना खतरनाक है ये सीसा
डॉक्टरों के मुताबित सीसा(lead) इंसान खासकर बच्चों के शरीर के लिए काफी नुकसानदायक है.
अधिक लेड सेवन की वजह से किडनी खराब हो सकती है और नर्वस सिस्टम डैमेज हो सकता है.
इसके अलावा खून की कमी ,जोड़ों में समस्या और लीवर पर भी खतना बना हुआ रहता है.
 बता दे की 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लेड बेहद घातक है और ये उनके दिमाग पर बुरा असर डालता है जिससे उनका आईक्यू लेवल कमजोर होने लगता है.
बता दें की तय मानक के अनुसार किसी फूड प्रॉडक्ट में लेड की मात्रा 2.5 पीपीएम तक ही होनी चाहिए.
मगर टेस्ट भी हेल्थ भी का दावा करने वाली मैगी के नमूनों में इसकी मात्रा इससे काफी अधिक थी जो की हमारी सेहत के लिए किसी जहर से कम ना थी.
Nestle Maggi Noodles Lead
बड़ी मुश्किल से वापस ग्राहकों का जीता था विश्वास
गौरतलब है की देशभर में मैगी पर बैन लगने के बाद कंपनी के प्रोडक्टस बुरी तरह मार्केट में पीट गए थे.
लोगों ने मैगी का सेवन करना बंद दिया, यहां तक की अपने बच्चों को भी इसके हानिकारक मिलावट के बारे में बताकर उनकी रूचि भी खत्म कर दी.
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यही वजह है की बैन हटने के बाद जब जनवरी 2016 में मैगी वापस आई तब भी लोगों ने उसे अपनाने से मना कर दिया.
फिर कंपनी ने अपने ब्रांड अवेयरनेस और डॉक्टरों की राय को अपने एडवरटाइजमेंट में शामिल कर लोगों का आकर्षण वापस मैगी की तरफ खींचना शुरू किया.
अब जाकर मैगी की सेलिंग थोड़ी रफ्तार पकड़ी ही थी कि ऐसे में उसके वकीलों ने खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना गुनाह कबूल लिया.
अब देखना ये होगा की इस बात से  कितने लोग मैगी पर फिर से अपना भरोसा दिखाते हैं,या कितने इसे हमेशा के लिए अपने कीचन से गायब ही कर देते हैं.