Nipah Virus : जानें क्या है केरल में जानलेवा बन चुका निपाह वायरस, इसके लक्षण और उपाय

Nipah Virus
demo pic

Nipah Virus : निपाह वायरस का संक्रमण मरीज के संपर्क में आने से तेजी से फैलता है

Nipah Virus : पिछले दो सप्ताह से केरल में वायरस के रुप में घातक तबाही फैलाने वाले निपाह वायरस (NiV) ने दर्जनों से ज्यादा लोगों की जान ले ली है.

बताया जा रहा है कि यह वायरस चमगादड़ों से फैल रहा है, गंभीर बात यह है कि इस वायरस का संक्रमण केवल मनुष्यों में ही नहीं बल्कि अन्य जानवर में भी पैदा हो रहा है, जो अब पूरे प्रदेश में बहुत गंभीर रुप ले चुका है.
क्या है निपाह वायरस 
1998 के दौरान मलेशिया के कामपुंग सुनगेई निपाह में सबसे पहले इस निपाह वायरस की पहचान की गई थी. उस समय इस वायरस के फैलने का कारण सुअरों को बताया गया था, हालांकि बाद में फैले इस वायरस का कोई वाहक नहीं पाया गया.
6 साल बाद बांग्लादेश में 2004 में यह वायरस फिर से फैला जिसका कारण संक्रमित चमगादड़ के खाए फलों का सेवन करना पाया गया.
वहीं भारत में भी सबसे पहले यह वायरस जनवरी 2001 में सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में फैला था जबकि अप्रैल 2007 में पश्चिम बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था अब फिर पिछले दो हफ्तों से इस निपाह वायरस ने केरल में अपना कहर ढ़ाया हुआ है.
यह भी पढें – माइग्रेन के दर्द से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर, वैज्ञानिकों ने इजात की नई दवा

क्या हैं वायरस के लक्षण
इस बीमारी में शुरुआती तौर पर दिमाग में तेज जलन (इन्सेफेलाइटिस), सिर दर्द और बुखार होता है. बुखार के साथ मानसिक रूप से सुस्ती होने लगती है, याद्दाश्त कमजोर होना, भ्रमित हो जाना, साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है.
यही नहीं इस बिमारी का अगर  24 से 48 घंटे में पता ना लगाया गया तो इंसान कोमा में चला जाता है और सही समय पर इलाज नहीं होने की स्थिति में संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है.
बचने के उपाय
निपाह वायरस मूल रूप से जानवरों से इंसान में फैलता है इसलिए जानवरों के सीधे संपर्क में आने से बचें. इसके साथ ही संक्रमित मरीज से भी दूरी रखना चाहिए, और वायरस पीड़ित से मिलने पर सुरक्षा के उपाय करने चाहिए.
बता दें कि इस वायरस का वाहक फलों का रस चूसने वाले चमगादड़ होते हैं इसलिए जमीन पर गिरे या कटे और गंदे फल न खाएं. वहीं किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए.
यह भी पढें – Heat Stroke Precautions : हीट स्ट्रोक यानि लू से बचने के लिए बरतें ये साधारण सी सावधानी
बहरहाल मेडिकल साइंस ने इस वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है, ऐसे में इंसानों में NiV इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी या जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस आपके शरीर को पकड़ सकता है.
बता दें कि अभी इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए कोई इंजेक्शन नहीं बना है. वहीं सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की मानें तो निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग़ को नुक़सान होता है.