दुनिया में दूसरी बार हुआ चमत्कार, HIV पीड़ित इंसान इस तरह से हो गया ठीक

Patient Cure Of HIV AIDS

Patient Cure Of HIV AIDS : लंदन का मरीज HIV इन्फेक्शन से पूरी तरह हुआ मुक्त

Patient Cure Of HIV AIDS : मेडिकल क्षेत्र में आज बेशक दुनिया काफी आगे निकल चुकी है लेकिन अभी भी कुछ ऐसी बीमारियाँ हैं जो लाइलाज हैं.

इसी में से एक बीमारी का नाम है HIV जिसे हम एड्स भी कहते हैं, HIV एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनकर ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं.
लेकिन यहाँ आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में ऐसा चमत्कार दूसरी बार हुआ है जब डॉक्टरों की मेहनत से HIV पीड़ित इंसान को सही किया जा चुका है.
जानिए क्या है पूरा मामला?
ब्रिटेन के लंदन शहर में एक एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति दुनिया का ऐसा दूसरा व्यक्ति बन गया है, जो इस बीमारी को पूरी तरह से हराकर ठीक हो चुका है.
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इस बारे में जब डॉक्टरों से बात की गयी तो उनका कहना है कि, “इसके लिए मरीज का बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है. ये बोन मैरो स्टेम सेल्स जिसने डोनेट किए हैं, उसे दुर्लभ आनुवंशिक उत्परिवर्तन है, जो एचआईवी संक्रमण को दूर करता है.”
डोनर ढूँढने में आती है समस्या 
बताया जा रहा है कि इस व्यक्ति को साल 2003 में एचआईवी हो गया था इसके बाद साल 2012 में पता चला कि उसे बल्ड कैंसर हो गया है.
फिर साल 2016 में वह काफी बीमार हो गया जिसके बाद डॉक्टरों ने उसके सेल ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया.
इस ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को 18 महीनों तक एंटीरेट्रोवाइरल दवाई दी गईं और तीन सालों तक खास देखरेख में रखा गया.
डोनर में जेनेटिक म्यूटिलेशन CCR5 डेल्टा 32 है, जो एचआईवी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।.
इस युवक का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि, “इस बमारी को दूर करने की प्रक्रिया महंगी और जोखिम भरी है. डोनर को ढूंढने में भी काफी परेशानी आती है. जिन लोगों में CCR5 म्यूटिलेशन होता है वो अधिकतर उत्तरी यूरोपीय वंश के होते हैं.”
यानी कि डोनर ढूँढने की समस्या के मद्देनजर इस तरीके को HIV से निपटने का स्थायी तरीका तो शायद नहीं माना जा सकता है.
लेकिन वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि जब 2 HIV केस को ठीक किया जा चुका है तो ये बात हमें आश्वासित करती है कि HIV का इलाज़ मुमकिन है.
Patient Cure Of HIV AIDS
10 साल पहले भी सामने आया था ऐसा मामला 
इस बारे में साइंस पत्रिका नेचर में छपी एक स्टडी के मुताबिक ये कोई पहला ऐसा मामला नहीं है. आज से दस साल पहले भी एक मरीज एचआईवी के घातक वायरस से छुटकारा पाने में सफल रहा था.
इस स्टडी में इस बात का दावा किया गया है कि दोनों मरीजों का ब्लड कैंसर के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लाट किया गया, जिसमें जेनेटिक म्युटेशन का ध्यान रखते हुए स्टेम सेल्स दी गई. यह तरीका एचआईवी के वायरस को रोकता है.
इस बारे में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मानते हैं कि…
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और स्टडी के मुख्य लेखक रवींद्र गुप्ता ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि, “एचआईवी वायरस पीड़ित मरीज के साथ इलाज का यह तरीका अपनाते हुए हमने साबित कर दिया कि ये कोई पहला मामला नहीं था. अब तक एचआईवी से निपटने का तरीका सिर्फ दवाइयों को ही माना जाता है. वायरस को शरीर के अंदर दबाए रखने के लिए मरीज को दवाएं लेनी पड़ती है.” 
रवींद्र गुप्ता के मुताबिक, “यह प्रक्रिया विकासशील देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जहां लाखों लोगों के पास इलाज का कोई साधन ही नहीं है.”
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यहाँ ये बात भी जाननी ज़रूरी है कि दुनिया भर में तकरीबन 3.7 करोड़ लोग HIV नामक ज़हरीली बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन इसमें से महज 59 फीसदी को ही एंटीरिटरोवायरल थैरेपी (दवाइयों से इलाज) मिल पाती है.
एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया भर में हर साल तकरीबन 10 लाख से भी ज्यादा लोग एचआईवी से जुड़े कारणों के चलते जान गँवा देते हैं.
ऐसे में अब एचआईवी वायरस की दवाइयों के खिलाफ बढ़ती क्षमता भी वैज्ञानिकों को परेशान कर रही है.
रविन्द्र गुप्ता और इनकी टीम ने इस बात पर ख़ासा जोर देते हुए कहा कि, “बोन मैरो ट्रांसप्लांट एचआईवी के इलाज का व्यावहारिक विकल्प नहीं है. लेकिन इस तरह के मामले और संभावित इलाज के विकल्प वैज्ञानिकों को सटीक रणनीति अपनाने में मदद करेंगे.”