जानें क्यों जरूरी है महिलाओं के लिए गर्भावस्था में जेनेटिक टेस्ट

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Women Genetic Test in Pregnancy : कई बीमारियां गर्भ में ही मां-बाप के जीन्स से पैदा हो जाती हैं.

Women Genetic Test in Pregnancy : गर्भावस्था से लेकर शिशु के जन्म लेने तक मां और गर्भ में पल रहे शिशु का स्वस्थ्य होना बहुत जरूरी होता है.

यही कारण है कि डॉक्टर द्वारा दोनों पर विशेष ध्यान रखने के लिए सभी मुमकिन टेस्ट समय समय पर करवाया जाता है.
कई बार ऐसा भी होता है कि शिशु में कई बीमारियां गर्भ में ही मां-बाप के जीन्स से पैदा हो जाती हैं, इन बीमारियों से बचाव के लिए डॉक्टर महिलाओं को प्रेग्नेंसी पीरियड में ही जेनेटिक टेस्ट करवाने का सुझाव देते हैं.
बता दें कि गर्भ में मिलने वाली इन बीमारियों को अनुवांशिक बीमारियां या जेनेटिक डिसआर्डर कहा जाता है, जो डायबिटीज, कैंसर, हार्ट अटैक जैसी कई खतरनाक बीमारियों का रुप लेकर उभरते हैं.
यह बीमारियां शिशु के जीन्स में गर्भ में ही मिल जाती हैं जिनके लक्षण वयस्क होने या अधेड़ होने के बाद दिखते हैं.
हालांकि कई बार इन अनुवांशिक बीमारियों के लक्षण कुछ बच्चों में जन्म के 1-2 साल बाद ही दिखने लगते हैं. आइए जानते हैं क्यों बेहद जरूरी है ये टेस्ट….
Women Genetic Test in Pregnancy
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क्या है जेनेटिक टेस्ट
जेनेटिक टेस्ट गर्भवती महिलाओं का होता है जो यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि होने वाले बच्चे को माता या पिता से कोई जेनेटिक बीमारी तो नहीं मिली है.
इस टेस्ट की मदद से मां के गर्भ में ही शिशु को होने वाली अनुवांशिक बीमारियां जांच ली जाती हैं और परिणामों के अनुसार इलाज शुरू कर दिया जाता है.
मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार प्रेग्नेंसी में यह टेस्ट हर महिला को करवाना चाहिए ताकि बच्चे के जन्म से पहले ही उसमें होने वाली अनुवांशिक बीमारियां का पता किया जा सके.
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क्यों होती हैं जेनेटिक बीमारियां
दरअसल शिशु में दो तरह के जीन्स पाए जाते हैं, जिनमें एक जीन मां के जीन्स होते हैं और दूसरे पिता के, यही वह जीन्स होते हैं जो बच्चे के रूप, रंग, व्यवहार और नैन-नक्श को निर्धारित करते हैं.
यह जीन्स बच्चे में मां के गर्भ में ही पैदा हो जाते हैं, जिसके चलते कई बार मां-बाप के शरीर में मौजूद बीमारियां भी शिशु के अंदर पनप जाती हैं. इन बीमारियों को ही जेनेटिक डिसआर्डर कहा जाता है.
बता दैं कि जेनेटिक लक्षण और बीमारियां पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं. मेडिकल सांइस के मुताबिक पिता की बीमारियां या उसके परिवार में चली आ रही जेनेटिक बीमारियों का प्रभाव होने वाले शिशु पर अधिक पड़ता है.
यही वजह है कि इन बीमारियों के कारण जन्म से पहले ही शिशु को काफी संघर्ष करना पड़ता है.
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कब करवाएं जेनेटिक टेस्ट
डॉक्टर्स की मानें तो ये टेस्ट हर गर्भवती महिला को ही कराना जरूरी होता है, लेकिन ये अधिकतर उन गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी माना गया है, जहां दोनों साथियों के परिवार में या किसी एक के परिवार में कोई जेनेटिकल (वंशानुगत) बीमारी चली आ रही होती है.
बता दें कि वैज्ञानिकों द्वारा की गई शोध में कई बार गर्भावस्था के ऐसे मामले देखने को मिले हैं जिनमें प्रेग्नेंसी के दौरान मां के साथ कुछ बुरा घटा है या मां  के पहले पैदा होने वाले बच्चों में कुछ जन्मजात विसंगतियां पाई गई हैं.
इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट उन महिलाओं के लिए भी जरूरी है, जो देर से (आमतौर पर 30-35 साल के बाद) गर्भधारण करती हैं, क्योंकि देर से हुई प्रेग्नेंसी में भी होने वाले शिशु में जेनेटिक डिसआर्डर के मामले देखें गए हैं.
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कौन सी अनुवांशिक बीमारियां होती हैं खतरनाक
कुछ ऐसी अनुवांशिक बीमारियां भी होती हैं, जो शिशु के लिए खतरनाक साबित होती हैं. इन बीमारियों में थैलेसीमिया, सिकल सेल, हार्ट अटैक आदि शामिल हैं.
यही नहीं डायबिटीज, मोटापा, खून की बीमारियां, दिल की बीमारियां, आंख की बीमारियां, मिर्गी, कैंसर आदि जैसे रोग जन्म से ही पहले शिशु में मां-बाप के जीन्स द्वारा प्रवेश कर सकते हैं.
बता दें कि युनाइटेड नेशन्स इंटर एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल मॉर्टलिटी इस्टिमेशन (UNIGME) की एक रिपोर्ट में वर्ष 2017 में भारत में 8 लाख से ज्यादा शिशुओं की मौत जेनेटिक डिसआर्डर के चलते हुई है. जबकि 1,5200 ऐसे बच्चे थे जिनकी उम्र 5-14 साल के बीच थी.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के 15 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के ये आंकड़े 2017 में पूरे दुनिया में 60 लाख से ज्यादा हैं. इन आंकड़ों में 50.4 लाख ऐसे बच्चे थे जिनकी उम्र 5 साल से भी कम पाई गई थी.
इन आंकड़ों के अनुसार विश्वभर में जेनेटिक बीमारियों के चलते हर 5 सेंकड में 15 साल से कम उम्र का एक बच्चा मर जाता है.
इन भयानक आंकड़ों को अलग करके देखा जाए तो शिशु का गर्भ में होना या गर्भावस्था सिर्फ मां के लिए ही नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए खुशियों का दौर होता है, ऐसे में मां और बच्चे को हर तरह से अच्छा महसूस करया जाना सबकी जिम्मेदारी होती है.
इसलिए मां और आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के लिए इस जेनेटिक टेस्ट का कराना भी एक जिम्मेदार कदम होना चाहिए ताकि जन्म के बाद बच्चा और उसका पूरा परिवार इस खुशी के एहसास को हमेशा जिंदा रख सके.