उत्तराखंड-15 वर्षीय किसान के बेटे ने देश का चौड़ा किया सीना

बचपन में हमारे स्कूलों में यह बात अक्सर समझाई जाती थी कि अगर हमारे इरादे मजबूत हों तो सफलता कदम जरूर चुमेंगी. इस वाक्य को सच कर दिखाया है उत्तराखंड के सत्येंद्र सिंह रावत ने. गरीब किसान के घर में जन्मे सत्येंद्र सिंह रावत ने कड़ी मेहनत के दम पर अपने बचपन के सपने को पूरा कर दिखाया है.
महज 15 वर्ष की उम्र में ही सत्येंद्र ने जूनियर एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2017 में सिल्वर मेडल जीतकर देश व सेना दोनों का मान बढ़ाया है.
एशिया की सबसे बड़ी बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सत्येंद्र ने चीन, कजाकिस्तान, उत्तर कोरिया के धुरंधर मुक्केबाजों को बुरी तरह चित कर फाइनल में अपनी जगह बनाई. हालांकि फाइनल मुकाबले में सत्येंद्र उज्बेकिस्तान के हुसैन अल्वर से 3-2 के मामूली अंको से हार गए, मगर टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अगले वर्ष होने वाली वर्ल्ड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए अपनी जगह जरूर पक्की कर ली है.
सत्येंद्र के बॉक्सिंग करियर पर एक नजर
सत्येंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के सीमावर्ती जनपद चमोली के छोटे से गांव घूनी के रहने वाले हैं. सत्येंद्र को बचपन से ही बॉक्सिंग का शौक था. लेकिन पारिवारिक आर्थिक हालत उनके सपनों में हमेशा आड़े आती रही. लेकिन वर्ष 2010 में जब उत्तर माध्यमिक विद्यालय चौनाघाट के खेल शिक्षक जोगेंद्र सिंह बोरा की नजर सत्येंद्र की बाक्सिंग पर पड़ी तो वो उससे बहुत प्रभावित हुए. और उसके बाद उन्होंने ही सत्येंद्र को बॉक्सिंग के गुर सिखाना शुरू कर दिया.
कोच जोगेंद्र सिंह के साथ करीब दो वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद सत्येंद्र का चयन देहरादून के स्पोटर्स कालेज में हो गया, जहां उसने दो वर्ष की ट्रेनिंग ली. इसके बाद वर्ष 2014 में सत्येंद्र सेना का गढ़वाल रेजीमेंट की ब्वॉयज स्पोटर्स कंपनी में सेलेक्शन हो गया.
इसी वर्ष जून माह में गुवाहाटी में आयोजित नेशनल जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2017 में भी सत्येंद्र ने गोल्ड मेडल भी जीता था.
सेना का बढ़ाया मान-
सत्येंद्र सिंह लैंसडोन (पौड़ी) छावनी में गढ़वाल रेजीमेंट की ब्वॉयज स्पोटर्स कंपनी का हिस्सा हैं. सत्येंद्र के मेडल जीतने की खबर सुनकर उनके साथियों व सेना के अधिकारियों में खुशी का माहौल छा गया.
किसान काे बेटे हैं सत्येंद्र
सत्येंद्र के पिता महेंद्र सिंह रावत घूनी गांव में खेतीबाड़ी करते है. जिससे उनके परिवार का पालन पोषण होता है. पिता महेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि सत्येंद्र बचपन से ही बॉक्सिंग में जाने की तमन्ना रखता था. मगर माली हालत ठीक न होने के कारण मैं कभी उसका सहयोग नहीं कर पाया. उन्होंने कहा कि लेकिन मेरे बेटे ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अपने सपने को पूरा कर दिखाया है. जिसकी मुझे बहुत ही खुशी है.