ताजमहल पर नहीं है किसी हिंदू भगवान का अधिकार- एएसआई

आगरा के स्थानीय अदालत में ताज महल को लेकर चल रही सुनवाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर आ गई है. ताजमहल बनाम तेजोमहालय के दावे की ये लड़ाई लंबे समय से अदालत में लंबित चल रही थी.

बीते गुरूवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अदालत से कहा कि ताजमहल मुस्लिम वास्तुकला का एक उत्कृष्ट भाग माना जाता है. एएसआई ने याचिकाकर्ताओं के दावे को खारिज करते हुए कहा कि ताजमहल एक कब्र है मंदिर नहीं.
एएसआई पुरातात्विक अनुसंधान और देश में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार सरकारी विभाग है.
सिविल जज (वरिष्ठ डिवीजन) के अदालत में दायर एक लिखित बयान में एएसआई ने इस विवाद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि विश्व धरोहर स्थल हिंदू भगवान शिव को समर्पित मंदिर पर बनाया गया था.
कैसे पनपा था ताजमहल बनाम तेजोमहालय का विवाद
1 99 8 में पी.एन. ओक की किताब ताजमहल: द ट्रू स्टोरी का हवाला देते हुए लगभग ढ़ाई साल पहले अप्रैल 2015 में 6 वकीलों ने अदालत में एक मुकदमा दायर किया था ,जिसमें यह दावा किया गया था ताज महल एक हिंदू मंदिर है जिसका नाम तेजामहालय है.
ओक की इस किताब में कहा गया था कि 1155 में भारत के मुस्लिम आक्रमण से पहले यहां एक शिवलाय मौजूद था. जहां लोग पूजा अर्चना करते थे, जिसे मुगल शासकों ने अपने शासनकाल में तुड़वा दिया था .
वकीलों ने अपने मुकदमे के जरिए अदालत से ताज महल के अंदर प्रवेश की अनुमति मांगी थी. ताकि सभी हिंदू श्रद्धालु इस परिसर में जाकर दर्शन और आरती कर सकें.
उन्होंने स्मारक के अंदर मौजूद सभी बंद कमरे खोलने की भी मांग अदालत के सामने रखी हुई है.
फिलहाल अभी सिर्फ मुस्लमानों को ही ताज महल के अंदर पूजा करने की इजाजत है, जहां वो स्मारक से जुड़ी एक मस्जिद में शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं.
अदालत में पेश होने वाली भारतीय संघ और एएसआई के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के मामले में कोई विशिष्ट स्थान नहीं है और न ही उन्हें पूजा या किसी अन्य धार्मिक अनुष्ठान का अधिकार है.
उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एएसआई ने यह दावा किया कि यह एक मकबरा है जिसे मुगल शासक शाहजहां ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था.
गौरतलब है कि अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, संस्कृति मंत्रालय, गृह सचिव और एएसआई को अपने जवाब दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया था.
इस मामले की अगली सुनवाई अदालत ने 11 सितंबर को तय की है.