भारत सरकार पूर्वी राज्यों में रह रहे चकमा और हजांग शरणार्थियों को जल्द देगी भारतीय नागरिकता

World Refugee Day 2018
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भारत सरकार ने पांच दशक पहले से पूर्वोत्तर राज्यों में रह रहे एक लाख चकमा और हजांग शरणार्थियों को जल्द ही भारतीय नागरिकता देने का फैसला किया है.
यह सभी शरणार्थी सालों पहले तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान(बांग्लादेश) से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में आकर बसे थे.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में चकमा और हजांग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का आदेश दिया था. जिसे बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में मंजूरी दे दी गई.
गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने यह जानकारी देते हुए बताया कि चकमा और हजांग शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने से स्थानीय नागरिकों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होने दी जायेगी.
अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, रिजीजू और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की मौजूदगी में हुई बैठक में अदालत के इस फैसले को लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा की गयी.
रिजीजू ने कहा कि इन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने के लिये बीच का रास्ता अपनाया जायेगा. जिससे न्यायपालिका के आदेश का पालन भी सुनिश्चित हो सके और स्थानीय लोगों के अधिकारों में कोई कटौती भी न हो.
उन्होंने कहा कि चकमा शरणार्थी अरणाचल प्रदेश में 1964 से रह रहे हैं और इन्हें नागरिकता देने संबंधी अदालत के आदेश का यथाशीघ्र पालन करने की जरुरत है.
वहीं अरूणाचल प्रदेश के तमाम सामाजिक संगठन शरणार्थियों को नागरिकता देने का विरोध कर रहे हैं.
इनकी दलील है कि इससे राज्य की जनसांख्यिकी की स्थिति बदल जायेगी.
इसके मद्देनजर केंद्र सरकार बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करते हुये चकमा और हजांग शरणार्थियों को जमीन खरीदने सहित अन्य अधिकार नहीं देने के प्रस्ताव सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है.

भाषा के इनपुट से