भारत में घुटनों का ऑपरेशन हुआ सस्ता

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सरकार ने बुधवार को घुटने के प्रत्यारोपण पर होने वाले खर्चों को नियंत्रण करने के लिए एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने घुटने के प्रत्यापर्ण के एवज में अस्पतालों द्वारा वसूली जाने वाली राशि को 54,000 रुपये से 1.14 लाख रुपये तक की अधिकतम सीमा तय कर दी है. जो वर्तमान में होने वाले खर्च से 70 फीसदी कम है.
प्राइवेट अस्पतालों में इम्प्लांट्स पर अवैध मरीजों से ज्यादा वसूली की जाती थी. जिसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने घुटने के इम्प्लांट्स पर एमआरपी को सीमित कर दिया है.
आकड़ों के मुताबिक भारत में 1.5 करोड़ से 2 करोड़ ऐसे मरीज़ हैं जिन्हें घुटने के इम्प्लांट्स की आवश्यकता होती है. वहीं हर साल घुटने की परेशानी से निजात पाने के लिए लगभग 1.2 लाख से 1.5 लाख सर्जरियां भारत में होती हैं. लेकिव इस सुविधा के शुरू होने के बाद मरीज प्रति वर्ष लगभग 1500 करोड़ रुपये की बचत कर पाएंगे.
सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले धातु (कोबाल्ट-क्रोमियम) पर 54,720 रुपये की दर से जीएसटी तय कर दी गयी है. जो पहले की औसत एमआरपी 1,58,324 रुपये से 65 फीसदी कम हुई है. इसके अलावा टाइटेनियम और ऑक्सीडिजित ज़िरकोनियम के दाम भी जीएसटी के आने बाद 76,600 रुपये हो गया है. जो पहले की 2,4 9, 251 रुपये की औसत दर से 69 फीसदी कम है.
रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत ने कहा कि हमारे देश में 1.5 से 2 करोड़ लोग घुटने की समस्याओं से पीड़ित हैं. जिन्हें सस्ते इलाज की अति आवश्यकता है . इसी को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की कीमतों को कम किया जा रहा है. ताकि प्राइवेट हॉस्पिटल का अनैतिक मुनाफा खत्म हो जाये.
इवेट अस्पतालों में आए दिन घुटने की सर्जरी की कीमतें बढ़ा कर अनैतिक व्यापार हो रहा है. अनंत सिंह ने  कहा कि हमारी सरकार ने इस तरह के गलत धंधे को रोकने और राष्ट्र स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है साथ ही उन्होंने अस्पतालों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई एमआरपी से अधिक 18 % वसूल करेगा तो उन अस्पतालों के लाइसेंस रद्द हो जाएंगे.
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अनुमान में बताया गया है कि 2020 तक विश्व में घुटनों के कारण ज्यादा समस्या होगी.