देश में छाया वायु प्रदूषण का कहर, 4.70 करोड़ बच्चे गंदी हवा में सांस लेने को मजबूर

Greenpeace Air Quality Report
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Greenpeace Air Quality Report : गंगा किनारे के शहर होते हैं ज्यादा प्रदुषित

Greenpeace Air Quality Report : ग्रीनपीस इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को लेकर डरा देने वाले तथ्य सामने आये हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में भारत की लगभग 53 फीसदी आबादी प्रदूषित हवा में सांस लेने में मजबूर है.

हैरान करने वाली बात तो ये है कि जिन 280 शहरों का विश्लेषण किया गया है उनमें से 55 करोड़ लोग ऐसे इलाके में रहते हैं जहां  पार्टीकुलेट मेटर (पीएम-10) का स्तर राष्ट्रीय मानक से कहीं अधिक है.
वहीं इसमें से 18 करोड़ लोग केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा तय सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से दोगुने ज्यादा प्रदूषण स्तर वाले इलाके में अपना जीवनयापन कर रहे हैं.
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बच्चों में बढ़ रहा प्रदुषण का खतरा
ग्रीनपीस की इस रिपोर्ट को उजागर करने वाले सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया का कहना है कि उनके पास देश की कुल जनसंख्या का सिर्फ 16 प्रतिशत लोगों को वायु गुणवत्ता का रियल टाइम  आंकड़ा उपलब्ध है. जो ये साफ दर्शाता है कि हम वायु प्रदूषण जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिये कितना जागरूक है.
इस रिपोर्ट के अनुसार 4 करोड़ 70 लाख बच्चे ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां सीपीसीबी द्वारा तय मानक से पीएम-10 का स्तर अधिक है. जिसमें 1 करोड़ 70 लाख वे बच्चे भी शामिल हैं जोकि मानक से दोगुने पीएम10 स्तर वाले क्षेत्र में निवास करते हैं.
इन बच्चों में सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली की हैं. इन राज्यों में लगभग 1 करोड़ 29 लाख ऐसे बच्चे रह रहे हैं जो पांच साल से कम उम्र के हैं और प्रदूषित हवा की चपेट में हैं.
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इन शहरों का यह है हाल
अगर औसत पीएम 10 स्तर के आधार पर रैंकिग को देखें तो पता चलता है कि साल 2016 में दिल्ली 290 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के साथ शीर्ष पर बना हुआ है.
वहीं वाराणसी 236, गाजियाबाद 236, हापुड़ 235, बरेली 226, फिरोजाबाद 223, कानपुर 217, लखनऊ 211, आगरा 197, नोएडा 195, मुरादाबाद 195, इलाहाबाद 192, गजरौला 191, मथुरा 172, फरीदाबाद 272, भिवाड़ी 262 और पटना 261 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के साथ दिल्ली से थोड़ा ही पीछे हैं.
आश्चर्य की बात तो है कि पहाडी क्षेत्र देहरादुन भी शीर्ष दस की सूची में शामिल है, जहां औसत पीएम-10, प्रदुषण 238 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा है.
वहीं रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रदूषित गंगा के मैदानी इलाके में बसे शहर हैं.
गौरतलब है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने वाली ग्रीनपीस एक अंतराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य पृथ्वी पर पेड पौधे के संरक्षण और आने वाली पीढ़ी को जहरीले प्रदुषण से बचाना है.

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