देश में डॉक्टरों का बड़ा संकट, 11528 लोगों पर सिर्फ एक चिकित्सक तैनात

कैंसर
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हाल ही में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए मासूम बच्चों की मौत के मामले ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि हमारे देश की मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था अपनी बदहाली से जूझ रही है.
देश में डॉक्टरों की कमी को लेकर बनाई गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे यहां 11,528 लोगों के इलाज के लिए सिर्फ 1 डॉक्टर मौजूद है. जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप हर एक हजार व्यक्ति पर एक डॉक्टर की नियुक्ति होनी चाहिए.
हालांकि यह रिपोर्ट देश में मौजूद सरकारी अस्पतालों पर किए गए अध्यन पर बनाई गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय की हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 10.5 लाख डॉक्टर पंजीकृत हैं जिनमें से 1,06414 ही सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों एवं अस्पतालों में अभी तैनात हैं. वहीं अंदाजा है कि इन पंजीकृत डॉक्टरों में से करीब तीन लाख अभी संक्रीय नहीं होगें या फिर वो विदेश चले गए होंगे.
इसके बावजूद देश में 7.5 लाख डॉक्टर मौजूद हैं मगर उनकी नियुक्ति सरकार नहीं कर रहीं हैं . जिसके कारण इतने बड़े देश में मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों का आभाव बना हुआ है.
डेन्टल सर्जन भी नहीं है पर्याप्त

वैसे तो देश में दांत के डॉक्टरों की भरमार पड़ी हुई है, लेकिन सरकारी तंत्र में इनकी भी भारी कमी है. रिपोर्ट के अनुसार देश भर के सरकारी अस्पतालों में अभी कुल 5614 डेंटल सर्जन कार्यरत हैं. यानि की एक डेन्टल सर्जन के जिम्मे करीब 2,17,448 मरीजों का इलाज हैं.

दिल्ली के हालात कुछ बेहतर
स्वास्थ्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बाकि राज्यों के मुकाबले दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर है. दिल्ली में सरकारी डॉक्टरों की कुल जनसंख्या 20092 है. यानि की वहां एक डॉक्टर के जिम्मे 2203 लोग है.
वहीं पहाड़ी क्षेत्र कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में यह अनुपात और भी अच्छा है. वहां कुल 4919 डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में तैनात है. और औसतन 1419 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध हैं.
साभार- हिन्दुस्तान