Hyderabad Fish Kill: फार्मा कंपनियों के जहरीले रसायन से झील की 23 लाख मछलियों की मौत

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फोटो साभार- द न्यूज मिनट

Hyderabad Fish Kill: मछुआरों को हुआ 10 करोड़ का नुकसान

Hyderabad Fish Kill: हैदराबाद के संगरेड्डी जिले के गांधीगुडेम झील में जहरीले रसायनिक पदार्थ के पानी में घुल जाने से लाखों मछलियों के मरने का मामला सामने आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद के काज़िपली इंडस्ट्रियल एस्टेट की 30 फार्मा कंपनियों से निकलने वाले जहरीले रसायन की वजह से इन मछलियों की मौत हुई है. मरने वाली मछलियों की संख्या लगभग 23 लाख बताई जा रही है.
एक अनुमान के मुताबिक इन मछलियों के मरने से मछुआरों को लगभग 10 करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है.
स्थानीय मछुआरों ने बताया कि ज्यादातर मछलियां रोहू प्रजाति की थीं जिनका वजन 2 किग्रा से लेकर 8 किग्रा तक था.
उन्होंने बताया कि मछलियों को कुछ साल पहले ही झील में मछली पालन कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया था.
गौरतलब है कि तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि झील में रसायनिक ज़हर मिलने के कारण ही मछलियों की मौत हुई है.
उन्होंने जानकारी दी कि झील के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे जिसमें यह स्पष्ट हो गया है कि मछलियों की मौत पानी में ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आने से हुई है.

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फार्मा कंपनियों पर दर्ज हुए केस
इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए मायलन, हिटरो फार्मा, अरबिंदो, एसएमएस फार्मा, श्रीराम और वेंटेक कंपनियों पर कार्यवाही शुरू कर दी है.
पुलिस ने इन फार्मा कंपनियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 277 (सार्वजनिक जलाशय के पानी को दूषित करने) और 278 (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माहौल बनाने) जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.
जिला परिषद के सदस्य शंकर गौड ने बताया की हम लोगों ने तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पहले ही बता दिया था कि कंपनी अपने रासायनिक जहर को झील में डाल रही है, लेकिन उसके बाद भी बोर्ड द्वारा कोई कड़ा निर्णय नहीं लिया गया.
उन्होंने कहा कि मछलियों की इन मौतों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी लापरवाही शामिल है.
आपको बता दें कि 3 अक्टूबर को इस क्षेत्र में लगातार होने वाली भारी बारिश के बाद इन कंपनियों से 48 घंटे तक केमिकल वेस्ट निकाला गया जो कि सीधे झील में जाकर गिरा.
वहीं बीते कुछ सालों से देश में जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.
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