देश की पहली ‘पेपर-लेस’ संस्था बनी मद्रास यूनिवर्सिटी

QS Asia University Ranking 2019
मद्रास यूनिवर्सिटी ने खुद को पूरी तरह से पेपर-लेस करने का फैसला किया है.
सिंडिंकेट सदस्यों की हुई बैठक में यूनिवर्सिटी को पूरी तरह से पेपर लेस करने के बारे में सर्वसम्मति से निर्णय लिया जा चुका है.
 कयास लगाए जा रहें है कि यूनिवर्सिटी के इस कदम से संस्था हर साल अपने करोड़ों रुपए बचाने के साथ-साथ प्रशासनिक कामों को करने में भी तेजी लाएगी.
आपको बता दें कि पूरी तरह से खुद को पेपर लेस करने वाली 160 वर्षीय मद्रास यूनिवर्सिटी ऐसा करने वाली देश की पहली संस्था है.
गौरतलब है कि मद्रास यूनिवर्सिटी हर साल दो शैक्षिक परिषद की बैठकें, दो सीनेट बैठकें और कम से कम 12 सिंडिकेट बैठकों का संचालन करती है.
जिसमें सिंडिकेट के 27 सदस्य, सीनेट के 125 सदस्य और शैक्षिक परिषद के 200 से ज्यादा सदस्य हिस्सा लेते हैं.
इन बैठकों में उठने वाले मुद्दों से लेकर सदस्यों को दी जाने वाली कार्य सूची, ये सभी कागजों पर मुद्रीत की जाती है जिनमें सैकड़ों पेपरों का इस्तेमाल किया जाता है .
जबकि यूनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने में ही अकेले 1000 पृष्ठों की खपत हो जाती है.
इसके अलावा परीक्षा, संचार से संबंधित काम और दस्तावेजों को तैयार करने में भी मौजूदा समय में काफी पेपर का उपयोग किया जाता है.
इन्हीं विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए यूनिवर्सिटी के सिंडिकेट सदस्यों ने ये प्रशंसनीय फैसला लिया है.
संस्था के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब से सेमिनार, सम्मेलनों और शैक्षणिक कार्यक्रमों के सभी आमंत्रण को कागजों पर मुद्रीत नहीं किया जाएगा. बल्कि उन्हें लोगों तक ई-निमंत्रण के माध्यम से भेजा जाएगा.
इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी दी कि फिलहाल पेपर के काम का इस्तेमाल केवल नियुक्तियों और वित्त संबंधित मामलों के लिए ही किया जाएगा, जब तक की सिस्टम व्यवस्थित नहीं हो जाता.
वहीं यूनिवर्सिटी के वॉइस चांसलर पी दुरैसामी ने कहा कि कागजों और प्रिंटर के इस्तेमाल ना होने से यूनिवर्सिटी की 70 प्रतिशत तक की राशि बचने की उम्मीद है.

साभार- टीओआई