15 अगस्त 1947 की सुबह फहराया गया एकमात्र तिरंगा आज भी सुरक्षित

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14 अगस्त 2017 की रात 12 बजे भारत की आजादी की घोषणा के बाद फहराए गए राष्ट्रीय ध्वजों में से एकमात्र ध्वज आज भी सही स्थिति में है. चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में फहराया गया ये एकमात्र प्राचीन तिरंगा है,जो आज भी वैसै का वैसा ही है.
इस फोर्ट को ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिंस डे ने सन् 1644 में बनवाया था. यह किला उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था. इस झंडे को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई ने अपने सार्थक प्रयासों से अब तक संरक्षित कर रखा हुआ है.
इस ध्वज को पहले कई दशकों तक एएसआई के ‘रिजर्व कलेक्शन’ में रखा गया था. जिसे बाद में 26 जनवरी 2013 को फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में बने म्यूजम में आम लोगों की प्रदर्शनी के लिए रखा गया.
सेंसर लाइटों से घिरा है तिरंगा
हालांकि ध्वज का संरक्षण कोई आसान काम नहीं है. लकड़ी और कांच से बने एयरटाइट शोकेस में रखा यह झंडा सिलिका जैल के छह कटोरों से घिरा हुआ है. इस जैल को हर समय ध्वज के पास की नमी को सोखने के लिए रखा गया है.
हॉल के अंदर और शोकेस के ऊपर प्रकाश की उचित व्यवस्था रखने के लिए एक ‘लक्स मीटर’ का इस्तेमाल किया जाता है. हॉल में हर समय वातानुकूलन के जरिए तापमान को भी एक समान रखा जाता है. शोकेस के आसपास इंसानी सेंसर वाली एलईडी लाइटें लगी हैं. जब भी कोई व्यक्ति इस झंडे को देखने आता है तो यह लाइटें ऑटोमेटिक जल जाती है.
अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई भाषा से कहा कि हम शोकेस पर प्राकृतिक रोशनी भी नहीं पड़ने देते. हमें 24 घंटे यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि ध्वज तक कोई धूल,कंकड़ना पहुंच सके. उन्होंने बताया कि यहां बेहद मजबूत सुरक्षा वाले उपकरण हैं, जिनमें ट्रिगर साइरन भी शामिल है.
अधिकारी ने बताया कि यह एकमात्र राष्ट्रीय ध्वज है, जिसे आज तक संरक्षित रखा गया है.
गौरतलब है कि 12:8 फुट के इस ध्वज को 15 अगस्त 1947 की सुबह 5 बजकर 5 मिनट पर फोर्ट सेंट जॉर्ज पर ब्रिटिश संघ के जैक को हटाकर फहराया गया था.  उस वक्त इस झंडे के ध्वाजारोहण का हजारों लोग गवाह बने थे.