Pandit Nain Singh Rawat : अपनों के बीच एक गुमनाम के हुनर पर फिदा हुआ गूगल

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Pandit Nain Singh Rawat : गूगल ने बनाया डूडल

Pandit Nain Singh Rawatस्व. पंडित नैन सिंह रावत, एक ऐसा नाम जिसकी अपनों ने तो कदर नहीं की, लेकिन विश्व के सबसे बडे़ सर्च इंजन गूगल ने उन्हें खास सम्मान से नवाजा है.

शनिवार को गूगल के डूडल पर पूरा दिन स्व. नैन सिंह की फोटो दिखाई देती रही. जिस वजह से पूरा देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर के लोग उनके बारे में जानने को उत्सुक दिखे.
रस्सी, लकड़ी से बनाया तिब्बत का नक्शा
पंडित नैन सिंह रावत का जन्म उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुन्स्यारी तहसील के मिलम गांव में 21 अक्टूबर 1831 को हुआ था.
नैन सिंह रावत विश्व के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने 1960 के दशक में ही तिब्बत देश का पहला नक्शा बना लिया था. जो आगे चलकर तिब्बत का आधिकारिक नक्शा बनाने में काफी मददगार साबित हुआ.
इस नक्शे को बनाने के लिए उन्होंने सबसे पहले तिब्बत की यात्रा की और उसकी भौगोलिक स्थितियों का गंभीरता से अध्ययन किया.
आपको बता दें कि नैन सिंह बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे. इसलिए उन्होंने संसाधनों की कमी के कारण रस्सीलकड़ी जैसी वस्तुओं के सहारे तिब्बत का नक्शा बनाया था.
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जान खतरे में डालकर की तिब्बत की यात्रा
तिब्बत का नक्शा सबसे पहले बनाना ही अपने आप में एक उपलब्धि है, लेकिन नैन सिंह रावत की इस उपलब्धि के पीछे कई और खास बातें भी हैं, जो इसे और महान बनाती हैं.
दरअसल, जिस समय नैन सिंह रावत ने तिब्बत की यात्राएं की, उस समय तिब्बत में बहुत बुरा दौर चल रहा था. वहां बाहरी आदमी के मिलने पर उसे तुरंत ही मौत के घाट उतार दिया जाता था.
इसके बावजूद नैन सिंह ने 1867 में उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा दर्रे से होते हुए तिब्बत के थोक जालूंग गए.
इसके बाद 1873-74 में शिमला से लेह और यारकंद तक की यात्रा की. उनकी आखिरी और सबसे खास यात्रा 1874-75 में ल्हासा से लद्दाख की थी.
यह ऐसे दुर्गम इलाके माने जाते हैं, जहां से लोगों के लौटने की गुंजाइस बहुत कम रहती है.
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ब्रिटिश सरकार ने उपहार में दिए 3 गांव
नैन सिंह की इसी बहादुरी और हुनर से प्रभावित होकर ब्रिटिश शासक ने उन्हें 1877 में यूपी के बरेली जिले के 3 गांव उपहार स्वरूप भेंट किए थे.
इतना ही नहीं, नैन सिंह के इस बहादुरी भरे कारनामे के किस्से सर्वे आफ इंडिया की ऐतिहासिक किताब में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया गया है.
अपनों ने ठुकराया, परायों ने अपनाया
हमारे देश का हमेशा से यह दुर्भाग्य रहा है कि हम अपने देश की प्रतिभाओं का समय पर सम्मान नहीं करते हैं.
जब भी किसी भारतीय प्रतिभा को दूसरे देशों से सम्मानित किया जाता है, इसके बाद ही उसकी प्रतिभा हमारी नजरों में आती है.
यह कहना गलत नहीं होगा कि हमारे बीच आज भी विश्व के विख्यात सर्च इंजन गूगल के सम्मान के बाद ही नैन सिंह रावत का नाम सुर्खियों में आया है.
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