कौन हैं अंडमान में अमेरिकी नागरिक की हत्या करने वाले आदिवासी, जानें इनके बारे में सबकुछ

Sentinelese Murdered American Man In Andaman
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Sentinelese Murdered American Man In Andaman : घुसपैठिया समझ इस आदिवासी समुदाए ने किया अमेरिकी पर्यटक का कत्ल 

Sentinelese Murdered American Man In Andaman : भारत में साल के 12 महीने 365 दिन बाहरी देशों के पर्यटकों का आने का सिलसिला जारी रहता है, ऐसे में हाल ही में एक अमेरिकी नागरिक हमारे देश घूमने आया था.

इस बीच उसने अंडमान निकोबार के एक छोटे से टापू पर रहने वाले सेंटीनेलिस समुदाए के जनजातिय लोगों से मिलने की इक्षा जाहिर की…
वहां के स्थानीय मछुआरे उसे सेंटीनेलिस लोगों से मिलवाने के लिए उनके टापू पर ले गए जहां से अब तक वो अमेरिकी नागरिक वापस नहीं लौट सका.
ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ये सेंटीनेलिस लोग कौन हैं और उस अमेरिकी के साथ क्या हुआ ? 
अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से 50 किलोमीटर दूर स्थित नॉर्थ उत्तरी सेंटिनल द्वीप में रहने वाले लोगों की एक जाती का नाम सेंटीनेलिस है, इस जाती के लोग अभी तक इतने पिछड़े हैं कि मछली खाकर जीवन बिताते हैं, इनकी भाषा भी एक दम अलग है.
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अमेरिकी नागरिक जब वहां पहुंचा तो उन्होंने उसे घुसपैठिये  के रूप में देखा और उसपर हमला कर दिया, इसमें उसकी मौत हो गयी है.
इसके बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार तो किया है लेकिन अभी-भी मामला साफ़ नहीं है.बता दें कि अमेरिकी नागरिक का शव भी मछुआरों की मदद से मिला है और अभी जांच की जा रही है.
Sentinelese Murdered American Man In Andaman
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तो ऐसे हुई पूरी घटना 
अमेरिका से आया जॉन मछुआरों की मदद से सेंटीनेलिस लोगों से मिलने जाना चाहता था लेकिन पहले वह असफल रहा, दूसरी बार में उसे 7 मछुआरे अपने साथ ले गए और उसे बीच पर छोड़कर आ गए जहां सेंटीनेलिस लोग रहते हैं.
कुछ समय बाद मछुआरों ने देखा कि सेंटीनेलिस लोगों ने जॉन को रस्सी से बांधकर मार दिया है और उसका शव रेत में गाढ़ रहे है लेकिन उनकी हिम्मत सेंटीनेलिस लोगों को रोकने की नहीं हुई.
इसके बाद एक मछुआरे ने पुलिस को सूचना दी और मामले की जांच शुरू हुई, जॉन का शव अगले दिन सुबह  समुद्र किनारे मिला जिसको  पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
बता दें इस मामले में किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होगी क्योंकि सेंटीनेलिस लोगों को सुरक्षित जनजाति के तौर पर रखा गया है और जॉन किसी से पूछे बगैर उनसे मिलने गया था.
धर्म प्रचार को मिला रहा एंगल
दरअसल वहां की स्थानीय मीडिया के अनुसार मृतक जॉन चौ एक मिशनरी थे जो ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए सेंटिनलीज़ लोगों से मिलना चाहते थे.
मीडिया के मुताबिक चौ पहले भी पांच बार अंडमान-निकोबार द्वीपों का दौरा कर चुके थे. वे ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए सेंटिनली जनजातियों से मिलने की इच्छा रखते थे.
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पुलिस नहीं ले सकती कोई एक्शन
2011 की जनगणना के अनुसार इस द्वीप पर  15 पुरूष और 3 महिलाएं रहती है.यहां के लोगों से किसी का कभी कोई संपर्क नहीं रहता है.
ऐसा माना जाता है कि ये जनजातिय लोग इस द्वीप पर पिछले 60 हजार सालों से रह रहे हैं और ये एशिया के सबसे पुराने अनछुए आदीवासी हैं .
उनके साथ कोई संपर्क या उनके निवास क्षेत्रों में प्रवेश पूरी तरह अवैध घोषित है. यहां तक की उनके वीडियो या फोटो लेना भी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है.
 2017 में सरकार ने स्पष्ट किया था कि सेंटिनेलियों को आदिवासी जनजाति के रूप में पहचाना जाता है. उन्हें दिखाए जाने वाले वीडियो सोशल मीडिया या इंटरनेट पर अपलोड नहीं किए जा सकते हैं.
यही वजह है कि इस द्वीप के लोगों पर मुकदमा भी नहीं चलाया जा सकता.