Swachh Ganga Mission : मां गंगा को साफ करने के लिए पानी के अंदर छोड़ा जाएगा गंदगी खाने वाले जीवाणु

GD Agrawal Ganga Conservation Demand

Swachh Ganga Mission : सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के लगाने में हो रही थी देरी

Swachh Ganga Mission : भारत सरकार की महात्वकांक्षी योजना स्वच्छ गंगा अभियान के बेहतर नतीजों में हो रही देरी को देखते हुए सरकार ने एक नया तरीका निकाला है.

2019 के चुनाव को देखते हुए अब केंद्रीय की मोदी सरकार इस प्रोजेक्ट के सफल नतीजे लाने के लिए नई तकनीक पर काम करने जा रही है.
दरअसल इससे पहले सरकार गंगा की सफाई के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) लगाने पर काम कर रही थी.
मगर उसमें लगने वाले काफी समय को देखते हुए अब वो इस पर और ज्यादा काम करने के मूड में नही है.
ऐसे में सरकार ने बैक्टीरियल बायॉरेमेडिएशन तकनीक के जरिए गंगा के पानी को स्वच्छ बनाने का निर्णय लिया है.
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बैक्टीरियल बायॉरेमेडिएशन तकनीक के तहत पानी के अंदर गंदगी खाने वाले जीवाणुओं को छोड़ा जाएगा जो पानी में मौजूद प्रदूषकों जैसे तेल और ऑर्गैनिक मैटर को खा लेता है.
खास बात यह है कि ये बैक्टीरिया किसी प्रकार की गंध नहीं छोड़ते हैं. और इस प्रक्रिया में गंदे नालों से आ रही बदबू भी घटती है.
इस ट्रीटमेंट के दौरान भारी धातु और जहरीले रसायन जैसे प्रदूषक भी कम हो जाते हैं. फिलहाल पटना के बाकरगंज नाले में इस तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है.
इसके अलावा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की ओर से हाल ही में इसके दो और पायलट प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है.
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गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने अपनी तरफ से जारी एक नोट में कहा है कि गंदे नाले के पानी को सीधा गंगा और सहायक नदियों में मिलने से रोकने के लिए हमारा प्रयास उतना सफल नहीं हो पाया.
इसलिए हमें जल्द से जल्द इन प्रदूषक तत्वों को रोकने की जरूरत है.
दुनिया में इस समय कई सारी नई तकनीक मौजूद हैं, जिसका हमें उपयोग करना चाहिए.
ऐसे में वास्तविक स्थान पर होने वाला यह ट्रीटमेंट काफी सरल होता है, और इसे आसानी से संचालित भी किया जा सकता है. जबकि इसके लिए ड्रेन में किसी बड़े बदलाव की भी जरूरत नहीं होती है.
NMCG ने कहा है कि बायॉरेमेडिएशन टेक्नीक काफी कम खर्चीली है और इसके शुरू होने में महज 6 से 8 महीने का ही समय लगता है.

साभार – टीओआई

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