तमिलनाडु में फैक्टरी प्रदुषण के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन में 11 लोगों की मौत, कौन है जिम्मेदार ?

Tamil Nadu Tuticorin Plant Protest

Tamil Nadu Tuticorin Plant Protest : वेदांता की स्टरलाइट कॉपर यूनिट से होने वाले प्रदुषण को लेकर हुआ था प्रदर्शन

Tamil Nadu Tuticorin Plant Protest : भारत में फैक्टरियों से निकलने वाली दूषित दवा से आज हर कोई परेशान है, इसके विरोध में अब तक ना जाने कितने प्रदर्शन हुए होंगे मगर समस्या जस की तस बनी हुई है.

एक बार फिर इसी मुद्दे को लेकर दक्षिण में लोग भड़के हुए हैं. फैक्टरी से होने वाले प्रदुषण को लेकर इनका गुस्सा इतना बढ़ गया है कि मंगलवार को यह एक हिंसात्मक रूप में बदल गया जिसमें अभी तक 11 लोगों की मौत हो गई है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, तमिलनाडु के तुतीकोरन के लोग इलाके में मौजूद वेदांता की स्टरलाइट कॉपर यूनिट को पिछले महीने से बंद करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
इन लोगों का कहना है कि वेदांता का यह युनिट हवा और पानी दोनों को प्रदुषित कर रहा है जिससे वहां के आसपास के रहने वाले लोगों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है कि इसे लेकर इन्होंने कई बार प्रशासन को सूचित किया मगर वो इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे रहे.
आखिरकार, मंगलवार को इन लोगों का गुस्सा फुटा और सड़कों पर लोगों का प्रदर्शन उग्र हो गया.
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार प्लांट की तरफ बढ़ने से पुलिस द्वारा रोके जाने के कारण प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और पुलिस के वाहनों को पलटकर उसमें आगजनी करने लगे.
इसके बाद पुलिस ने कार्यवाही करते हुए गोलियां चलाई जिसमें अबतक 11 लोगों की मौत और करीब 50 लोगों के घायल होने की भी खबर है.
पुलिस अधिकारी ने बताया है कि मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इकाई को सुरक्षा प्रदान करने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है.
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सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
इस हिंसक वारदात में मरहम लगाने के लिए सरकार ने मुआवजे की घोषणा कर दी है.
तमिलनाडु के सीएम पलानीस्वामी ने प्रदर्शन में मारे गए मृतकों के परिजनों को 10 लाख, जबकि गंभीर रूप से घायलों को 3 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान किया है. इसके अलावा सरकार ने मारे गए परिजन के सदस्य को सरकारी नौकरी भी ऑफर करने का फैसला किया है.
इसके अलावा घटना की जांच के लिए एक जांच आयोग भी बना दिया गया है.
क्यूं बंद नहीं हो रहा प्लांट
वेदांता के प्लांट को बंद कराने के मुहीम में जुटे स्थानिय निवासी को सरकार की तरफ से ना का ही रास्ता दिखाया गया है.
सरकार का कहना है कि स्टरलाइट कॉपर तूतीकोरिन युनिट के पास आवश्यक परमिट हैं और उसने किसी भी मानदंड का उल्लंघन नहीं किया है.
ऐसी स्थिती में प्लांट को बंद करना इतना आसान नहीं है. लेकिन स्थानिय निवासी द्वारा इस मांग को इस कदर हिंसक रूप बनाने की बात किसी ने भी शायद सोची न होगी.
बता दें कि वेदांता समूह की इकाई स्टरलाइट इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड का संयंत्र तूतीकोरिन में पिछले 20 साल से चल रहा है, और इसमें अभी 400,000 टन  कॉपर कैथोड प्रतिवर्ष उत्पादन होता है.
हालांकि ताजा अपडेट के मुताबिक मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरै बेंच ने तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर यूनिट के निर्माण पर रोक लगा दी है.
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 सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
आपको बता दें कि तमिलनाडु के तुतीकोरन इलाके के इस प्लांट को बंद करने का आदेश पहले भी दिया जा चुका है.दरअसल, मार्च 2013 में संयंत्र में गैस रिसाव के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने इसे बंद करने का आदेश दिया था.
लेकिन जबतक इस आदेश को पूरा किया जाता कंपनी एनजीटी में चली गई इसके बाद एनजीटी ने राज्य सरकार का फैसला उलट दिया. इसके बाद राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में चली गई और अब इसकी याचिका शीर्ष अदालत में लंबित है.
लोगों के रूष्ट होने और सरकार की चुप्पी दोनों ही दक्षिण में सरकार के प्रति रोष को और भी बढ़ा रही है. अब देखना है कि इस केस में आगे सरकार की क्या रणनीति होगी.

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