कॉल ड्राप पर ट्राई हुआ सख्त, लगेगा 10 लाख तक का जुर्माना

इंडियन एक्सप्रेस
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भारतीय दूरसंचार नियामक ट्राई ने लगातार बढ़ रहे कॉल ड्रॉप के मामलों को गंभीरता से लेते हुए नेटवर्क ऑपरेटर्स के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. ट्राई की तरफ से जारी नए दिशा निर्देशों के तहत अगर कोई भी ऑपरेटर लगातार 3 महीनों तक कॉल ड्रॉप के तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उस पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
इस नए संशोधित नियम के अनुसार हर दूरसंचार कंपनी अपने सर्कल क्षेत्र में 98 प्रतिशत कॉल्स को 90 मिनट तक बिना किसी अवरोधक के संचालित करने में सक्षम होनी चाहिए. यानि की कुल कॉल्स का सिर्फ 2 प्रतिशत ही कॉल ड्राप की श्रेणी में आना चाहिए. जबकी खराब मौसम में मोबाइल साइटों को दी जाने वाली यह छूट 3 प्रतिशत तक रहेगी.
वहीं नियामक ने रेडियो लिंक टाइम आउट प्रौद्योगिकी (आरएलटी) के लिए भी मानक तय किए हैं. क्योंकि इस टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा उपयोग दूरसंचार ऑपरेटर कॉल ड्रॉप को छुपाने के लिए करते हैं.
ट्राई के अध्यक्ष आरएस शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि हमने 1 से 5 लाख तक की जुमार्ने की राशि का प्रस्ताव रखा है. जिसे नेटवर्क ऑपरेटर के खराब प्रदर्शन के कारण दंड के रूप में लिया जाएगा.
ट्राई सचिव एसके गुप्ता ने कहा कि यदि कोई कंपनी लगातार 3 महीने तक अपने खराब मानकों को सुधारने का प्रयत्न नहीं करती है तो उस पर जुमार्ने की राशि दोगुनी हो जाएगी.
हांलाकि जुमार्ने की अधिकतम राशि 10 लाख से अधिक नहीं वसूली जाएगी. उन्होंने कहा कि पहले यह राशि 50,000 थी.
क्या है कॉल ड्रॉप
जब आप किसी को कॉल करते है या कोई आपको कॉल करता है तो दोनों लोगों के बात करने के दौरान बीच में बिना किसी के फोन काटे अचानक फोन कट जाता है. ऐसे में बिना आपकी अनुमति के नेटवर्क में दिक्कत आने की वजह से आपका फोन कट जाता है तो उसी को कॉल ड्रॉप कहा जाता है.