उत्तराखंड- टीचर को बेइज्जत करने चले थे शिक्षा मंत्री, गलत जवाब देकर खुद ही फंस गए

शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय शिक्षिका से सवाल पुछते हुए
आपने टीवी पर बच्चों और कभी – कभी शिक्षक को भी गलत जवाब देते हुए सुना होगा. लेकिन क्या आपने राज्य के शिक्षामंत्री को बच्चों वाला गलत जवाब देते हुए सुना है.
मगर उत्तराखंड राज्य में कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला है जहां राज्य के शिक्षा मंत्री टीचर को बेइज्जत करने के चलते गलत जवाब देकर खुद की ही किरकिरी करा बैंठे
क्या है पूरा मामला
हुआ यूं कि सोमवार को उत्तराखंड राज्य के शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय राजधानी देहरादून से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र के राजकीय इंटर कालेज में औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे.
वहां पहुंचते ही वह सीधे सामने चल रही एक कक्षा में दाखिल हो जाते हैं, जहां एक शिक्षिका पहले से ही बच्चों को पढ़ा रही होती है.
बच्चों और मीडिया के सामने अपनी धाक जमाने के लिए शिक्षा मंत्री ताव में आकर शिक्षिका से सवाल पूछतें हैं कि  बताओ माइनस (-) प्लस (+) (-)माइनस क्या होता है ?
तीसरी कक्षा का यह मामूली सा सवाल सुनते ही शिक्षिका थोड़ा अटपटा जाती है, उन्हें लगता है कि शायद मंत्री जी ने मजाक में बच्चों वाला सवाल पूछा हो. इसलिए वह उनका सम्मान करते हुए कुछ समय के लिए चुप हो जाती हैं.
मगर शिक्षिका को चुप रहते देख मंत्री जी को लगता है कि शायद उन्हें सवाल का उत्तर नहीं मालूम. इसके बाद मंत्री जी उससे तेज आवाज में कहते हैं, हमने कुछ पूछा है तुमसे, जवाब दो उसका
तब शिक्षिका को यह अहसास होता है कि शिक्षा मंत्री जी उसकी क्लास ले रहे हैं. वह एकदम से जवाब देते हुए कहती है कि सर (-) (+) (-)= (-) ही होगा
शिक्षिका के जवाब सुनते ही मंत्री जी उस पर बिफर जाते हैं और कहते हैं तुम्हें इतना भी नहीं मालूम, माइनस (-), प्लस (+), माइनस (-) = प्लस (+) होता है.
मंत्री जी के मुंह से निकला गलत जवाब सुनकर शिक्षिका को ताज्जुब होता है. और क्लास के सारे बच्चे भी उनपर खूब हंसने लगते हैं
शिक्षिका को घेरने के चक्कर में खुद फंस गए मंत्री जी
दरअसल, शिक्षा मंत्री जी ने सोचा था कि वह टीचर की क्लास लेंगे. जिसके लिए वह पहले से ही मूड बनाकर भी आए थे. लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि टीचर की क्लास लेने के चक्कर में वह खुद ही हंसी का पात्र बनकर रह जाएंगे.
शिक्षा मंत्री के व्यवहार पर भड़का शिक्षक संघ
आपको बता दें कि उत्तराखंड में राजकीय शिक्षक संघ प्रदेश का सबसे बड़ा और मजबूत संघ है.
शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय द्वारा शिक्षिका के साथ किए गए व्यवहार को अपमानजनक बताया है.
उन्होंने कहा कि अगर मंत्री जी को सच में शिक्षिका का टेस्ट लेना भी था तो वह उसे अलग कार्यालय में सवाल पूछ सकते थे. लेकिन मंत्री ने पूरी कक्षा के सामने शिक्षिका से सवाल पूछा, ताकि उसको बेइज्जत किया जा सके.
संघ की तरफ से कहा गया कि यह कोई पहला मामला नहीं है सरकार के मंत्री पहले भी इस तरह से शिक्षकों को अपमानित कर चुके हैं. जिसकी वजह से हर बार शिक्षकों की छवि को ठेंस पहुंचती है.
मंत्रियों को किस काबिलियत पर मिलते हैं पद ?
गजब की बात है दोस्तों, जिस राज्य का शिक्षा मंत्री ही मामूली सा ज्ञान न रखता हो, उस राज्य की शिक्षा का विकास कैसे होगा.
इस घटना के बाद यह सवाल जहन में आना लाज़मी है कि आखिर कौन से आधार पर ऐसे विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है.
क्या इतनी बड़ी जिम्मेदारी को सौंपने से पहले उनकी योग्यताओं को परखा नहीं जाना चाहिए.