देश में Wildlife Smuggling का गढ़ बन गया है पश्चिम बंगाल

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फोटो साभार- विकिपीडिया
Wildlife Smuggling: सीमावृत्ती इलाकों में वन्य जीवों पर मंडरा रहा खतरा
भारत में Wildlife Smuggling से जुड़े मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. देश की नेपाल और भूटान से जुडों राज्यों की सीमा में बेजुबान जीवों की तस्करी एक गंभीर विषय बन गई है.
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम राज्य से इन जीवों की भारी मात्रा में तस्करी की जा रही है. जिसमें बीते तीन साल में पश्चिम बंगाल राज्य वन संपदा की तस्करी करने का गढ़ बन गया है.
दोनों देशों से लगी लगभग 2500 किमी लंबी सीमा के आसपास घने जंगलों से wildlife smuggling में लगभग आधी हिस्सेदारी पश्चिम बंगाल की हो गयी है.
यह जानकारी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने वन्य जीवों की तस्करी के सालाना आंकड़ों के आधार पर दी.
गौरतलब है कि नेपाल और भूटान के सीमावर्ती पांच राज्यों पर चौकसी की जिम्मेदारी एसएसबी जवानों के पास ही रहती है. इसके साथ ही उनके पास वन क्षेत्रों से होने वाले अपराधों पर भी नकेल कसने का दायित्व है.
भाषा  के मुताबिक वन्य जीवों और वन संपदा की तस्करी जैसे अपराधों से जुड़े एसएसबी के जवानों ने बीते तीन सालों 247 मामले दर्ज किये है. जिनमें से अकेले 125 मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हुए हैं.
इसके बाद उत्तर प्रदेश से 54, बिहार से 36, असम से 29 और उत्तराखंड में 3 मामले दर्ज हुये हैं
एसएसबी के सालाना आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 से 2017 के दौरान की गयी wildlife smuggling का मूल्य 244.56 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. जबकि वन संपदा को होने वाले इस नुकसान में पश्चिम बंगाल की सर्वाधिक 192.70 करोड़ रुपये की भागीदारी रही है.
हर साल हो रही इन आकड़ों में वृद्धी ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है.
देश की सीमा सुरक्षा में लगे एसएसबी जवान 175.1 किमी लंबी भारत नेपाल सीमा और 699 किमी लंबी भारत भूटान सीमा पर तैनात हैं.
इन सीमावृति पांच राज्यों के वन क्षेत्रों में स्तनपायी जीवों की 150 प्रजातियां, पक्षियों की 650, मछलियों की 200, सरीसृप जीवों की 69 प्रजातियां पायी जाती हैं.
हालांकि तस्करों के निशाने पर ज्यादातर इन इलाकों में पाये जाने वाले हिम तेंदुआ, सफेद हिरण, बाघ, एशियाई हाथी, हिमालयन नीली भेड़ और किंग कोबरा रहते हैं.