Wushu World Championship: भारत को मिला पहला गोल्ड, पूजा कादियान ने किया नाम रोशन

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Wushu World Championship: कई बार देश को दिलाया मेडल

Wushu World Championship: कजान से भारत के लिए बुधवार को एक बेहद बड़ी और अच्छी खबर आई है.

दलअसल भारत की पूजा कादियन ने बुधवार को कजान में आयोजित वुशु विश्व चैंपियनशिप जीतकर भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया है. आपको बता दें कि वुशु खेलों में देश को गोल्ड दिलाने वाली पूजा कादियन पहली भारतीय खिलाड़ी हैं.
पूजा कादियान ने महिलाओं के 75 किलो सांदा वर्ग में यह पदक जीता है. फाइनल में उन्होंने रूस की एवगेनिया स्टेपानोवा को पराजित कर ये मेडल अपने नाम किया.
पूजा कादियान ने इससे पहले सेमीफाइनल में इजिप्ट की हेबा अब्देलकदार को 2-0 से शिकस्त देकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी.
गौरतलब है कि इस संस्करण में भारत ने कुल पांच मेडल अपने नाम किए. जिसमें रमेशचंद्र सिंह मोइरंगथम (पुरुष, सांदा-48 किग्रा), भानु प्रताप सिंह (पुरुष, सांदा-60 किग्रा) और राजेंद्र सिंह (पुरुष, सांदा-90 किग्रा) ने कांस्य मेडल भारत की झोली में डाले.
वहीं महिलाओं के वर्ग में अरुणपेमा देवी केइशम ने 65 किलो सांदा वर्ग में कांस्य मेडल जीता. अरुणपेमा ने क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड की प्रीसेला स्टेबुली को 2-0 से हराया.
फिलहाल चैंपियनशिप में चीन 15 मेडल जीतकर शीर्ष पर चल रहा है, और ईरान आठ मेडल के साथ दूसरे स्थान पर है.
पहले भी अपने नाम किया कई पदक
इससे पहले पूजा ने 2013 में वुशु के विश्व स्तरीय खेलों में रजत पदक जीता था. उस समय भी उनकी इस जीत को भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया था.
डेली एक्सीसिसर की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूजा कादियान के नाम 5वीं एशियाई जूनियर वुशु चैम्पियनशिप मकाउ में कांस्य पदक, बालि में रजत पदक,तुर्की में कांस्य और वियतनाम में रजत पदक जीत चुकी हैं.
क्या है वुशु ?
वुशु एक लोकप्रिय खेल है जिसकी शुरूआत 1991 में चीन के बीजींग शहर से हुई थी.
इस खेल को खेलने के लिए शरीर के बाहरी और अंदरूनी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रीत करना पड़ता है. इस खेल का नाम चीन के प्रख्यात मार्शल आर्ट्स कुंग फु से लिया गया है.
हालांकि यह खेल विश्व स्तर पर उतना ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है.
अंतराराष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रतियोगिताएं कुंग फु फेडरेशन आयोजित कराता है. इस खेल के मुख्य तौर पर दो फॉर्म है- तुलु और सांदा.
तुलु में खिलाड़ियों को मार्शल आर्ट्स की शैली पर आंका जाता है. जबकि सांदा चीनी बाक्सिंग का एक प्रारुप है. भारत ने अपने मेडल इसी फॉर्म में जीते हैं.
यह खेल पहली बार 1 9 8 9 में भारत आया था. वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पहले अध्यक्ष स्वर्गीय श्री आनंद कैकर को देश में इस खेल को लाने में निर्णायक माना जाता है.
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