खाड़ी देशों के अंदर लगभग हर दिन 10 भारतीय मजदूर गंवा रहे अपनी जान

Average Indian Labourer Death In Gulf Countries : अगस्त 2018 इन देशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या 22.53 लाख थी

Average Indian Labourer Death In Gulf Countries : विदेशों में रोजगार के अवसर तलाशने के मामले में हम भारतीयों की पहली पसंद खाड़ी देश ही रहते हैं.

ऐसा इसलिए क्योंकी वहां पर मजदूर वर्ग की ज्यादा मांग है और काम के बदले दाम भी अच्छा मिलता है जिससे वो टिके रहते हैं.
विदेश मंत्रालय की तरफ से 26 अगस्त 2018 को राज्यसभा में दिए गए एक सवाल के जवाब में बताया गया कि वर्ष 2017 में छह खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 22.53 लाख थी.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्ही देशों में काम करने वाले भारतीय लोगों की मौत के आकड़े भी सबसे ज्यादा है.
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हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 6 सालों के अंदर खाड़ी देशों में हर रोज लगभग 10 भारतीयों की मौत हुई है. इस जानकारी को सूचना के अधिकार कानून के तहत एक स्वयंसेवी समूह ने सार्वजनिक करी है.
दरअसल कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के वेंकटेश नायक ने विदेश मंत्रालय से बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में 1 जनवरी 2012 से मध्य 2018 तक हुई भारतीय मजदूरों की मौत का ब्योरा मांगा था.
जिसमें से संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत देशों को छोड़कर बाकी सभी देशों ने ब्यौरा दे दिया.
नायक ने कहा कि दिए गए ब्यौरे के मुताबिक 2012 से मध्य 2018 तक छह खाड़ी देशों में कम से कम 24,570 भारतीयों की मौत हुई है.
अगर पूरी मौत के आकड़ों को संगठित करें तो इन 6 वर्षो में हर रोज 10 से ज्यादा भारतीय मजदूरों ने खाड़ी देशों में अपनी जान गंवाई है.
अब यहां सवाल यह उठता है कि अगर इतनी मौतें हो रही है तब भी हम ज्यादातर भारतीय रोजगार की तलाश में खाड़ी देश ही क्यों जाते हैं.या तो उन्हें इन आकड़ों के बारे में नहीं पता होगा या फिर सब कुछ जानकर भी अच्छे पैसे की उम्मीद में उन्हें ये रिस्क उठाना अच्छा लग रहा है.
नायक ने कहा कि भारत को पूरी दुनिया भर से 410.33 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई है जिसमें से अकेले खाड़ी देशों से आना वाला पैसा ही 209.07 अरब डॉलर है, यानि की आधे से भी थोड़ा ज्यादा.
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गौरतलब है कि सीडीएस के अनुसार भारत से बाहर काम करने वाले लोगों में से 96 फ़ीसदी लोग सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, क़तर और ओमान में काम करते हैं.ऐसे में खाड़ी के देशों से पैसा आना कोई नया नहीं है.
इन 96 प्रतिशत में से करीब 40 प्रतिशत केरल से ही हैं और यदि केरल के लोग ऐसा ना करें तो वहां भारी बेरोजगारी हो सकती है.
नायक ने यह भी बताया कि मौतों से संबंधित ब्योरे में अंतर को पाटने के लिए उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में सवालों के जवाब में दिए गए ब्योरे का इस्तेमाल किया.

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