इस विधि-विधान से करें मां सरस्वती की पूजा,जरूर होंगी प्रसन्न

Basant Panchami 2019

Basant Panchami 2019 : सुबह 7.15 बजे से दोपहर 12.52 बजे तक है शुभ मूर्हत

Basant Panchami 2019 : भारत में हर देवी देवता को प्रसन्न करने के कई तरह के पर्व मनाए जाते हैं, इसी में से एक त्यौहार है बसंत पंचमी जिस दिन हम ज्ञान और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा करते हैं.

इस पर्व को हिंदु धर्म में बेहद अहम माना जाता है इस साल 10 फरवरी यानी की कल सरस्वती पूजा का दिन है.
बता दें की ये माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि को मनाया जाता है यही वजह है की इसे बसंत पंचमी भी कहते हैं. 
मान्यता है कि जिस छात्र पर मां सरस्वती की कृपा हो उसकी बुद्धि बाकी छात्रों से अलग और बहुत ही प्रखर होती है. 
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हिंदु धर्म में प्रचलित कथा के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन ही भगवान ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती की सरंचना की थी.
इस देवी के चार हाथ थे जिसमें से एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था.
ब्रह्मा जी ने इस देवी से वीणा बजाने को कहा, जिसके बाद संसार में मौजूद हर चीज़ में स्वर आ गया. इसलिए ब्रह्मा जी ने इन्हें वाणी की देवी नाम भी दिया.
यही वजह है की मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला की देवी कहा जाता है. 
बसंत पंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त : सुबह 7.15 बजे से दोपहर 12.52 बजे तक.
पंचमी तिथि प्रारंभ: मघ शुक्ल पंचमी शनिवार 9 फरवरी की दोपहर 12.25 बजे से शुरू. 
पंचमी तिथि समाप्त: रविवार 10 फरवरी को दोपहर 2.08 बजे तक.
सरस्वती पूजा विधि और मंत्र 
शास्त्रों में बसंत पंचमी के दिन कई नियम बनाए गए हैं, जिसका पालन करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं.
जिसमें सबसे अहम है की बसंत पंचमी के दिन सभी को पीले वस्त्र पहनने चाहिए और मां सरस्वती की पीले और सफेद रंग के फूलों से ही पूजा करनी चाहिए.
इस दिन मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप-दीप, अगरबत्ती, गुगुल जलाएं जिससे वातावरण में सकारात्मक उर्जा का संचार हो और आसपास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी. 
साथ ही प्रसाद के रुप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाईयां अर्पित करें.
कुछ क्षेत्रों में देवी की पूजा कर प्रतिमा को विसर्जित भी किया जाता है. विद्यार्थी मां सरस्वती की पूजा कर गरीब बच्चों में कलम और पुस्तकों का दान करें.
वहीं संगीत से जुड़े व्यक्ति अपने साज पर तिलक लगा कर मां की आराधना करें व मां को बांसुरी भेंट करें.

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मां सरस्वती जाप मंत्र 
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌ वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥