दिल्ली का सिग्नेचर ब्रिज आज से सबके लिए शुरू,आपने अब तक जानी इसकी खासियत

Delhi Signature Bridge Opens for General

Delhi Signature Bridge Opens for All : 154 मीटर की ऊंचाई पर लोगों के सेल्फी लेने के लिए एक ग्लास व्यूइंग बॉक्स बनाया गया है.

Delhi Signature Bridge Opens for All : राजधानी दिल्ली में 14 साल का इंतजार खत्म करते हुए कुतुब मीनार से भी लंबे सिग्नेचर ब्रिज आज आम आदमी के लिए खोल दिया गया है.

यह भारत का पहला असिमेट्रिकल केबल वाला ब्रिज है जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और बाहरी दिल्ली को जोड़ेगा.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को यमुना पर बने इस सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन कर दिया है. जिसके बाद यह ब्रिज आज यानि की सोमवार से आम लोगों के आवागमन के लिए भी शुरू हो चुका चुका है.
आइए जानते हैं सिग्नेचर ब्रिज की खासियत……
ब्रिज की बनावट
यमुना पर बने इस सिग्नेचर ब्रिज की लंबाई 575 मीटर है और ऊंचाई कुतुबमीनार (73 मीटर) की उंचाई से दोगुने से भी ज्यादा है.
ब्रिज के 154 मीटर टॉप पर पायलोन बनाया गया है जिसे एक ग्लास बॉक्स जैसा आकार दिया गया है. यहां से लोग दिल्ली का बर्ड्स-आई व्यू देखने के साथ सेल्फी का भी मजा ले सकेंगे.
ब्रिज के इस टॉप आर्कषण केंद्र पर पहुंचने के लिए चार एलिवेटर लगाए गए हैं जिसके द्वारा एक बार में 50 लोगों को पहुंचाया जा सकेगा.
हालांकि यह एलिवेटर अभी चालू नहीं किए गए हैं लेकिन जानकारी के अनुसार जल्द ही दो चार दिन में इन्हें लोगों के उपयोग के लिए शुरु कर दिया जाएगा.

सुरक्षा के लिए लगाए गए विशेष सेंसर
बता दें कि सिग्नेचर ब्रिज की सफाई के लिए विशेष तौर पर यूरोप से हाईटेक मशीनें मंगाई गई हैं, इन मशीनों की मदद से हेल्थ मॉनीटरिंग सिस्टम के तहत ब्रिज में 104 सेंसर लगाए गए हैं.
इनमें से 10 ब्रिज की केबल में और 5 सेंसर फाउंडेशन में लगाए गए हैं, यही नहीं ब्रिज के अन्य हिस्सों में भी सेंसर लगाए गए हैं.
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ये सेंसर ब्रिज के हर हिस्से की 24 घंटे निगरानी करेंगे और यदि ब्रिज में कहीं भी कोई भी गड़बड़ी नजर आएगी तो सेंसर के जरिए इसकी तुरंत जानकारी हासिल हो सकेगी.
ब्रिज के सभी सेंसर को एक कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है जहां 24 घंटे इसके हर हिस्से की मॉनीटरिंग होगी.
ब्रिज की निर्माण की कहानी और लागत
गौरतलब है कि 1998 में यमुना में बस गिरने से 22 छात्रों की मौत हो गई थी जिसके बाद यह सिग्नेचर ब्रिज बनाए जाने का निर्णय लिया गया था.
इस ब्रिज प्रोजेक्ट की योजना को 2004 में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने तैयार किया लेकिन इसे बनाने की मंजूरी दिल्ली कैबिनेट द्वारा 2007 में दी गई.
शुरुआती योजना कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले करीब 1131 करोड़ रुपये लागत से प्रोजेक्ट तैयार करने की थी, लेकिन प्रोजेक्ट में लगातार देरी होती रही और वर्ष 2015 में इसकी लागत करीब 1594 करोड़ रुपये हो गई.
आखिरकार दिल्ली वालों के लिए 14 साल बाद इस सिग्नेचर ब्रिज का इंतजार खत्म हुआ और लगभग 1518.37 करोड़ रुपये की लागत इसे तैयार कर शुरु कर दिया गया है.

ब्रिज की कनेक्टिविटी
यह ब्रिज वजीराबाद रोड को करनाल बाईपास से जोड़ेगा, साथ ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार, गोकुलपुरी, भजनपुरा और खजूरी की तरफ से मुखर्जी नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और आजादपुर जाने वाले रास्तों को भी इससे जोड़ा गया है.
वहीं कश्मीरी गेट से लोनी, सोनीपत, सहारनपुर, बागपत जैसे यूपी के शहरों में अब लोगों को ट्रैफिक जाम में नहीं फंसना पड़ेगा.
इसके अलावा दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाले लोगों के लिए यह ब्रिज आधे घंटे का समय बचाने में मददगार साबित होगा.
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बहरहाल देखा जाए तो 14 साल के लंबे इंतजार के बाद यह ब्रिज ट्रैफिक से जूझते लोगों के लिए एक सुकून की उम्मीद लेकर आया है.
इसके जरिए दिल्ली के कई लंबे रास्तों में लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सकेगी और साथ ही यातायात सुविधा में बेहतरी आने की भी आशा जताई जा सकती है.

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उद्घाटन समारोह में बीजेपी और आप में हुई भीड़ंत
गौरतलब है कि इस ब्रिज का उद्घाटन मुख्यमंत्री अविंद केजरीवाल को करना था. लेकिन वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे हुए थे.
बीजेपी कार्यकर्ता लगातार वहां खड़े होकर मनोज तिवारी और प्रधानमंत्री के नारे लगा रहे थे जिससे वहां आप और बीजेपी समर्थकों के बीच कई बार हल्की फुल्की झड़पों की खबरे आईं.

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एक तस्वीर में आप विधायक अमान्तुल्ला मनोज तिवारी को धक्का देते हुए दिखाई दे रहे हैं तो दूसरे में खुद सांसद और मनोज तिवारी को पुलिसवालों पर घूंसा चलाते हुए देखा जा सकता है.