इन खतरों को लेकर भारत का अमीर तबका रहता है सबसे ज्यादा चिंतित

Fear Of India's Richest
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Fear Of India’s Richest : 77% अमीर आतंकवाद के बढ़ते खतरे से चिंतित हैं.

Fear Of India’s Richest : हाल में जारी कई वैश्विक ऐजेंसियों के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है, ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि 2030 तक हमारा देश दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

इस बारे में देश का धनी तबका भी यही सकारात्मक रवैया रखता है, लेकिन आज के दौर में कहीं ना कहीं इन उद्योगपतियों के अंदर आतंकवाद,घरेलू और अन्तराष्ट्रीय राजनीतिक भय हमेशा खटकता रहता है.
अगर वित्त और निवेश सेवा कंपनी आईआईएफएल और वैश्विक ग्लोबल वैल्थ इंफोर्मेशन कंपनी वैल्थ एक्स की आईआईएफएल वेल्थ इंडेक्स 2018 शीर्षक वाली एक रिपोर्ट की मानें तो भारत के 77% अमीर आतंकवाद के बढ़ते खतरे से चिंतित हैं.
दरअसल IIFAL और GFI द्वारा देश के 500 अमीर लोगों पर आज की चिंताओं पर किए गए इस सर्वे में कई चौंकाने वाले आकड़े सामने आए हैं.
बता दें की शामिल किए गए लोगों को तीन अलग अलग समूहों में बांट दिया गया था पहले समूह में ज्यादा आय (नेट वर्थ) वाले लोग थे, दूसरे में उससे भी ज्यादा और तीसरे में सबसे ज्यादा नेट वर्थ वाले लोग रखे गए थे.
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इस सर्वेक्षण में शीर्ष चिंताओं के बीच सामाजिक मुद्दे दूसरे स्थान पर रहे जिसमें 73% अमीरों ने देश के सामाजिक तनाव को एक बड़ी समस्या माना.
रिपोर्ट में इस तरह की सामाजिक चिंताओं में अंतर- धार्मिक संघर्ष, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सामाजिक- आर्थिक असमानता शामिल है क्योंकि देश में अमीर और गरीब के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है.
वहीं रिपोर्ट के अनुसार 62 फीसदी भारत का अमीर कारोबारी तबका डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर आने के बाद से आई एक वैश्विक अनिश्चितता से भी घबराहट में है .
इसके इतर भारत के पाकिस्तान के साथ संबंध, चीन का दक्षिण चीन सागर में विस्तार और यूरोपीय संघ का टूटना भी इस वर्ग के लिए चिंता की बात है.
Fear Of India's Richest
धन संशय भी बड़ी परेशानी
इंवेस्टोग्राफी की सीईओ और संस्थापक, और प्रमाणित फाइनेंस प्लानर श्वेता जैन के मुताबिक वर्तमान परिपेक्ष में बिजनेसमेनों की चिंता अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के साथ साथ ह उसे और बढ़ाने की है.
जैन के मुताबिक समाज में प्रतिष्ठा बनाने के लिए लाइफस्टाइल पर भी भारी खर्च की जरूरत होती है. इसके अलावा इन लोगों में से कुछ लोग इस बात से भी चिंतित हैं क्योंकि वो जानते हैं ये हमेशा के लिए नहीं है.
इन सब भूराजनीतिक मुद्दों के अलावा 40 फीसदी लोग ऐसे भी हैं जो अपने भाग्य के खराब होने से घबराहट की स्थिति में रहते हैं, और इसके बाद उनके लिए आर्थिक वातावरण और उत्तराधिकार योजना भी ऐसे पक्ष हैं जो उन्हें सोचने पर मजबूर करते हैं .
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जैन ने कहा कि कुछ (एचएनआई) के लिए, विभिन्न देशों में रहने वाले उनके बच्चे और परिवार के व्यवसाय में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होना भी एक बड़ी चिंता है.
वहीं जिन परिवारों में 2-3 से अधिक बच्चे हैं, उनके लिए जिम्मेदारियों और संपत्तियों का बंटवारा भी एक बड़ी उलझन बन जाता है.
बता दें कि धन का संरक्षण और निवेश की नॉमिनल वैल्यू को बनाए रखना, भारत के अधिकांश
43% अमीरों की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
वहीं किए गए सर्वे में मात्र 18 फीसदी ही ऐसे थे जिन्होने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता खुद की
खुशी के लिए खर्च करने की रहती है.
गौरतलब है की आजकल इन सारी चिंताओं को कम करने के लिए और इनसे निपटने के लिए ज्यादातर अमीर कारोबारी कई वित्तीय सलाहकारों को भी रखते हैं.

साभार – Livemint

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