भारतीय वायुसेना मे शामिल हुआ अत्याधुनिक ताकतवर हेलीकॉप्टर ‘चिनूक’, जानें खासियत

Indian Air Force Chinook Helicopter
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Indian Air Force Chinook Helicopter : पाकिस्तान और चीन को देगा कड़ी टक्कर

Indian Air Force Chinook Helicopter : भारतीय वायुसेना को और शक्तिशाली बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ी शुरूआत करी है.

दरअसल मंत्रालय ने वायुसेना के बेडे में बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित चार चिनूक हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर शामिल किया है.
आज यानी की सोमवार को ये चारों हेलीकॉप्टर चंडीगढ़ स्थित वायुसेना स्टेशन पहुंच गए हैं.
बता दें कि इसकी ताकत और मारक क्षमता को देखते हुए वायुसेना प्रमुख बी. एस धनोआ ने इस दिन को सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताया है.
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हेलिकॉप्टर को वायुसेना में शामिल करने के कार्यक्रम में पहुंचे धनोआ ने इसकी विशेषता बताते हुए इसे राष्ट्र का धरोहर बताया है.
उन्होंने कहा कि चिनूक चिनूक हेलिकॉप्टर लगभग सभी सैन्य अभियानों में प्रयोग किया जा सकता है वो भी दिन और रात दोनों समय मे, सिर्फ इतना ही नहीं ये खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है
धनाओ ने कहा कि चिनूक को वायुसेना में शामिल करना ठीक वैसे ही एक गेमचेंजर साबित होगा जैसे फाइटर क्षेत्र में राफेल को शामिल करना.
कितना ताकतवर है चिनूक
इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि ये 9.6 टन तक वजन वाले कार्गो को आसानी से दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में ले जा सकता है.
जिसमें भारी मशीनरी, आर्टिलरी बंदूकें और हाई अल्टीट्यूड वाले लाइट आर्मर्ड वीकल्स भी शामिल हैं.
इसका उपयोग पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी तरह का सैन्य या रेस्क्यू ऑपरेशन में किया जा सकता है.
यह हेलीकॉप्‍टर करीब 315 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है.डबल इंजन वाला ये हेलीकॉप्टर वर्तमान में अमेरिका का सबसे तेज हेलीकॉप्‍टर में से एक है.
अन्य देशों में खुद को किया साबित
एक मीडिया रिपोर्ट्स की मुताबिक चिनूक हेलिकॉप्टर्स को वियतनाम से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के युद्ध में इस्तेमाल किया जा चुका है.
बोइंग इंडिया कंपनी के एक बयान की मानें तो इस सबसे पहले 1962 में उड़ाया गया था और तब से अब तक कंपनी ने कई अपग्रेडों के साथ 1179 चिनूक हेलिकॉप्टर बनाए हैं.
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भारत के लिए क्यों जरूरी
जैसा की आप सभी जानते होंगे की भारत को अपने बॉर्डरों को अधिक सुरक्षित करने के लिए वहां कई तरह के प्रोजेक्टों को शुरू करने की जरूरत है.
ऐसे में जरूरी है की वहां माल ढुलाई आसानी से हो सके और इसके लिए इस तरह के भारी माल ढोने वाले हेलीकॉप्ट की खासा जरूरत है.
आपको बता दें कि CH-47F (I) चिनूक हेलीकॉप्टर लद्दाख, कश्मीर और नोर्थ इस्ट क्षेत्र में आईएएफ मिशन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.