बेंगलुरु में सैनिटरी पैड्स की सबसे लंबी श्रंखला बनाकर बनाया गया वर्ल्ड रिकार्ड

Sanitary Pads World Record

Sanitary Pads World Record : 500 लोगों ने 1,078 मीटर लंबी लाइन में 10,105 पैड्स लगाए

Sanitary Pads World Record : ये कहना गलत नहीं होगा की आज भी महिलाएं के मासिक धर्म में इस्तेमाल होने वाले सैनिटरी पैड्स को लेकर समाज में जागरूकता का आभाव है.

लेकिन बीते कुछ वर्षो में कुछ लोगों के द्वारा इसे एक जनहित मुद्दा मानते हुए शहर से लेकर गांव की महिलाओं के बीच पीरिड्स के दिनों में सैनिटरी पैड्स के इस्तेमाल को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं.
इसमें सरकारी संस्थाओं से लेकर छोटे बड़े एनजीओ तक भी बढ-चढकर हिस्सा ले रहे हैं, यही नहीं पिछले साल तो बकायेदा इसपर एक फिल्म भी बनाई गई थी.
इसी तरह का एक और जागरूकता अभियान देखने को मिला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में.
यहां ऑल इंडिया कांग्रेस ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलॉजी (AICOG) के प्रतिभागियों ने मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सैनिट्री पैड्स की सबसे लंबी बनाकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाया है.

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बता दें कि 500 लोगों ने 1,078 मीटर लंबी लाइन में 10,105 पैड्स लगभग साढ़े सात घंटे में बिछाकर ये रिकार्ड कायम किया.
इसकी सबसे खास बात यह रही कि इसमें प्रथिभागियों ने Uterus(गर्भाशय) का एक आकार भी बनाया गया और नारा दिया गया ” Nothing’s more Cuterus than your Uterus”.
इसका मतलब है की आपके गर्भशाय से बड़ा कुछ भी नहीं है इसलिए इसे तमाम तरह के बैक्टिरीया से सुरक्षित रखने के लिए हाइजिनिक विधियों का इस्तेमाल करें.
जानकारी के लिए बता दें की इसे सराहनीय जागरूकता कदम को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया जा चुका है.
इस मौके पर स्त्री रोग विशेषज्ञ गीता प्रमोद शांभग ने कहा की शरीर के स्वच्छता के लिए हर महिला को सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करना चाहिए.
उन्होंने कहा की पीरियड्स के दिनों में अपने पार्ट्स की स्वच्छता ना रखने पर हमें भविष्य में पैल्विक संक्रमण,मूत्र संक्रमण,गर्भधारण में दिक्कतें समेत कई तरह की समस्याएं होने की गुंजाइश ज्यादा रहती है.
गौरतलब है की द नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 58% महिलाएँ ही मासिक धर्म की सुरक्षा के लिए हाइजीनिक विधि यानि की सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं.
पीरियड्स में घास, सूखे पत्ते इस्तेमाल करती हैं महिलाएं
गौरतलब है कि पूरी दुनिया में 130 करोड़ की महिला आबादी है जिसमें से भारत में ही औसतन 35.5 करोड़ महिलाएं और किशोर बालिकाएं मासिक धर्म से गुजरती हैं.
मगर हैरान करने वाली बात है कि इनमें से 70 प्रतिशत परिवार नियमित तौर पर अपने घर की महिलाओं के लिए सैनेटरी पैड खरीदने में असमर्थ रहते हैं.
आकड़ों की माने तो महिलाओं की जनसंख्या में दूसरे स्थान पर रहने वाले भारत में 88 प्रतिशत महिलाएं आज भी मासिक धर्म के दौरान पुराने कपड़े, सूखे पत्ते, लत्ते, सूखी घास, बुरादा और राख का इस्तेमाल करती हैं.
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इसी का परिणाम है कि आज देश में 23 फीसदी महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की शिकार हैं और 27 फीसदी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण पाए गए हैं .
यही नहीं महिलाओं की कई अन्य गंभीर बीमारियों और संक्रमण का कारण भी मासिक धर्म में अस्वच्छता और जागरुकता में कमी होना पाया गया है.
जाहिर है कि कई महिलाएं और किशोर लड़कियां समाज के निम्नतम भाग से हैं, जहां गरीबी और पुरानी प्रथाओं के चलते माहवारी में स्वच्छता और स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. जिसके कारण वहां के परिणाम बेहद दयनीय और भयानक होते हैं.