वाराणसी में गंगा पर बने मल्टी मॉडल टर्मिनल को लेकर पीएम ने क्यों बांधे तारीफों के पुल

Varanasi First Multi Model Terminal
फोटो साभार - ट्वीटर

Varanasi First Multi Model Terminal :   यह पहला ऐसा टर्मिनल है जो नदी के ऊपर बना है

Varanasi First Multi Model Terminal : ‘एक जमाना था, जब हमारे देश की नदियों मे बड़े-बड़े जहाज चला करते थे, लेकिन आजादी के बाद हमारी सरकारों ने इस पर ध्यान देने के बजाय इनकी उपेक्षा करनी शुरू कर दी.

नतीजा नदियों के जरिए शहरों में सामानों को आवगमन रूक गया और लोगों को माल पहुंचाने के लिए सड़कों और रेल पर निर्भर होना पड़ा.
सच पूछिए तो हमारी पूर्व की सरकारों ने नदियों की शक्ति के साथ बड़ा अन्याय किया, इन्ही गलतियों को सुधारने का काम मौजूदा मोदी सरकार करने जा रही है.
दरअसल हम बात कर रहे हैं  वाराणसी-हल्दिया नैशनल वॉटर-वे 1 पर बने  मल्टी मॉडल टर्मिनल की जिसका आज पीएम ने अनावरण किया है.

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इस दौरान उन्होंने मालवाहक जहाज ‘टैगोर’ से कंटेनर अनलोडिंग की शुरुआत भी की.
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जानिये क्या है इस टर्मिनल की खासियत  

दरअसल मल्टी मॉडल टर्मिनल  पहला ऐसा टर्मिनल है जो नदी के ऊपर बना है, यह कंटेनर कार्गो हैंडलिंग के लिए तैयार किया गया है.
वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग शुरू होने के बाद कोलकाता बंदरगाह के जरिये यह उत्तर भारत को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अन्य दक्षिण एशियाई को जोड़ेगा.

Varanasi First Multi Model Terminal

तो ये होगा इस टर्मिनल का फायदा 

जानकारों की माने तो यह  टर्मिनल 1500 से 2000 टन के बड़े जहाजों की भी आवाजाही आसानी से करने में सक्षम होगा. बता दें इसकी लम्बाई 1400 किलोमीटर है. इसकी मदद से भारत चीन को कड़ी टक्कर देते हुए दक्षिण एशिया के कारोबार में हिस्सेदारी बढ़ा सकेगा.
इसकी लागत करीब 206 करोड़  है और पीएम मोदी ने इसकी शरुआत साल 2015 में की थी.
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(आईडब्ल्यूएआई) के चेयरमैन प्रवीर पांडेय  ने बताया… 

परवीन पांडेय के अनुसार यदि रेल मार्ग से सामान भेजते हैं तो 1 रूपये प्रति किलोमीटर खर्च आता और सड़क से डेढ़ लेकिन इस टर्मिनल की मदद से यह खर्च मात्र 40 पैसे रह जायेगा।
फिलहाल अब यह जनता तय करेगी कि पीएम मोदी को 2019 में जगह देनी है या नहीं लेकिन उनका यह कदम देश के विकास की ओर काफी अहम माना जा रहा है.