बिहारियों को मिलेगा दुनिया का सबसे सस्ता पेयजल, फ्रांसीसी तकनीक का लिया सहारा

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Bihar Cheapest Drinking Water : एनजीओ सुलभ इंटरनेशनल की मदद से शुरू हुई परियोजना

Bihar Cheapest Drinking Water : आज भारत में बढ़ती जनसंख्या के लिए पीने लायक पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ी है.

आप देश के किसी भी कोने में जाइए आपको साफ पानी पीने के लिए काफी जद्दोजहत करनी पड़ेगी. या यूं कहें कि इसके लिए आपको अपनी अच्छी खासी जेब ढीली करनी पड़ सकती है.
कुछ दिनों पहले ही हमारे एक मित्र पहाड़ी क्षेत्रों में अपने परिवार संग घूमने गए थे वापस आकर उन्होंने बताया कि जितना उनका खाने पर खर्च नहीं आया उससे ज्यादा उन्होंने पीने वाले पानी की बॉटलों को खरीदने में अपनी रकम गंवाई है.
बता दें कि बढ़ते प्रदुषण की वजह से पानी में अब काफी जहरीले तत्व पाए जाने लगे हैं जो लोगों के रोगों का कारण बन रहे हैं.
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 दिलचस्प है कि यह समस्या आज हर जगह हो गई है, ग्रामीण क्षेत्रों में तो ये अब एक विकराल रूप लेती जा रही है क्योंकि वहां लोगों के पास इसका निवारण नहीं है.
लेकिन हाल ही में बिहार के दरभंगा में शुरू हुई सुलभ जल नाम की परियोजना गांव वासियों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता के लिए एक बेहतर उदाहरण के तौर पर देखी जा रही है.
दरअसल सामाजिक संगठन सुलभ इंटरनेशनल ने बीते शनिवार को दरभंगा जिले में एक परियोजना की शरुआत करी है जिसका उद्देश्य नदियों और तालाबों के प्रदूषित पानी को फिल्टर करके उसे पीने के लिए सुरक्षित बानना है.
खास बात यह है कि इस परियोजना के तहत लोगों को 50 पैसे में एक लीटर पीने पानी मुहैया करवाने का वादा किया गया है जो दुनिया भर में सबसे सस्ता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की मदद से प्रतिदिन 8,000 लीटर पीने योग्य पानी का उत्पादन किया जाएगा और फिर इसे उपभोक्ताओं को 50 रुपये प्रति लीटर की मामूली लागत पर उपलब्ध कराया जाएगा.
बता दें कि यह परियोजना बिहार में अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा जिसकी नींव सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने दरभंगा नगर निगम परिसर स्थित हरिबोल तालाब में रखी है.
संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने बताया कि एक दशक पहले सुलभ इंटरनेशनल द्वारा बिहार में ही सर्वप्रथम सुलभ शौचालय की शुरूआत की गई थी जो आज पूरे देशभर में सुचारु रूप से चल रही है.
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उन्होंने इस सुलभ जल परियोजना को लेकर कहा कि दरभंगा से पहले इसका प्रयाग फ्रेंच ऑरगाइनेशन की मदद से पश्चिम बांगाल में किया जा चुका है.
उन्होंने बताया कि बंगाल की नादिया, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जिलों में तीन साल पहले लॉन्च किया गया उनका यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा था.
पाठक ने कहा कि करीब 20 लाख की लागत से तैयारये परियोजान दरभंगा में भी दिसंबर तक शुरू हो जाएगी.