मथुरा में हाथियों के इलाज के लिए खुला देश का पहला अस्पताल

India's First Elephant Hospital

India’s First Elephant Hospital : हाथियों को इस अस्पताल में आधुनिक स्तर का इलाज मिलेगा 

India’s First Elephant Hospital : हिंदू धर्म में हाथियों को भगवान गणेश का साक्षात रूप माना जाता है, गाय की ही तरह इसकी भी लोग बड़ी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं.

लेकिन बीते कुछ समय से हमारे देश के अंदर ही इनकी हालात काफी चिंताजनक बनी हुई है.
जंगलों की घटती संख्या और इनके रखरखाव में आने वाली कमी के चलते दिन प्रतिदिन हाथियों की संख्या में तेजी गिरावट देखी जा रही है.वहीं बिमारी में सही समय से इलाज ना मिलना भी इनकी मौत का बड़ा कारण बन रहा है.
ऐसे में यूपी के अंदर एक गैर सरकारी संस्था ने इनहें बिमारी में इलाज मुहैया कराने के लिए अस्पताल खोला है.
बता दें कि राज्य के मथुरा जिले में हाथियों के लिए खोला गया ये अस्पताल देश का पहला चिकित्सक सेंटर है जहां घायल और बीमार हाथियों का आधुनिक इलाज किया जाएगा.
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बीते शुक्रवार को इसकी स्थापना दक्षिण एशिया में वन्यजीवों के लिए कार्य करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ एसओएस ने वन विभाग के साथ मिलकर करी है.

India's First Elephant Hospital

अस्पताल की विशेषता के बारे में बात करें तो यहां अत्याधुनिक तकनीकों से लैस एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी,हाइड्रॉथैरेपी, लेजर ट्रीटमेंट एवं अन्य मशीनरी और पैथॉलजी लैब स्थापित किए गए हैं.
इस पहले पूर्ण अस्पताल में देश के तमाम हिस्सों से रेस्क्यू कर लाए गए हाथियों को लाया जाएगा और उनका अचित इलााज किया जाएगा.
जानकारी के आपको बता दें कि मथुरा के फरह ब्लॉक के चुरमुरा गांव में खोला गया यह अस्पताल पूरे 12 हजार स्कवैर फीट एरिया में फैला है .
अस्पताल के उद्घाटन समारोह मे मौजूद एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस के सीईओ कटिक सत्यनारायण ने कहा कि यह सुविधा वन्यजीवों के संरक्षण की कड़ी में मील का पत्थर साबित होगी.
उन्होंने बताया कि अस्पताल में हाथियों का अच्छे से इलाज होगा और इस दौरान उका विशेष ध्यान भी रखा जाएगा.
बता दें कि ये एनजीओ आगरा के कीठम में भालू संरक्षण सेंटर और मथुरा में एलिफेंट कंसर्वेशन केयर सेंटर का भी संचालन पहले से कर रही है.
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भारत में कम हो रही हाथियों की संख्या
पिछले साल अगस्त महीने में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाथियों की जनगणना के परिणाम जारी किए थे.
उसके मुताबिक देश के 23 राज्यों में हाथियों की जनसंख्या में पिछले पांच सालों के मुकाबले 10% की गिरावट आई है. 2012 में जहां इनकी संख्या 30,000 थी वहीं ये अब घट कर 27,312 रह गई है.