कोलकाता का ये कैफे मंदबुद्धी और बेघर महिलाओं को आत्मर्निभर बनने का दे रहा मौका

Kolkata Crust Cure Cafe
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Kolkata Crust Cure Cafe : एनजीओ ने इन महिलाओं के जीवन में दिखाई नई रोशनी 

Kolkata Crust Cure Cafe :  अपने जीवन में हर तरह से मजबूर और निराश हो चुके लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना धरती का सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है.

हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसे ही लोगों पर आधारित है जिन्होंने जिंदगी से हार मान चुके लोगों की जीवन में नई रोशनी लाने का काम किया है.
ये कहानी है एक ऐसे कैफे कि जिसने सड़कों पर इधर उधर घूमने वाली मंदबुद्धी और मजबूर महिलाओं के जीवन को संवारने का काम किया है.
क्रस्ट एंड कोर नाम से शुरू हुआ ये कैफे एनजीओ ईश्वर संकल्प के तहत काम करता है जो कोलकाता के चेतला पुलिस स्टेशन के बगल में एक लेन में स्थित है.
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एनजीओ के सहायक सचिव रिंकू सोनी ने अपनी इस पहल के बारे में अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ से बातचीत में कहा कि क्रस्ट एंड कोर से उनकी कोशिश है कि वो इन लोगों को दिमागी तौर पर और मजबूत बनाए ताकि उन्हें दोबारा से उस जगह ना जाना पड़ा जहां उन्होंने अपने जीवन के सबसे बुरे दिन बिताए हैं.
सोनी ने कहा कि परियोजना शुरू होने से पहले 20 महिलाओं को पेशेवर शेफ द्वारा एक वर्ष से अधिक समय तक प्रशिक्षिण दिया गया था.
उन्होंने बताया कि इन महिलाओं में सबसे ज्यादा कमी आत्मविश्वाश की थी और वो इस काम को नहीं सीखना चाहती थी, यही नहीं लगभग 10 महिलाओं ने अपनी ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर चली गई.
लकिन जो सीख गए आज वो एक सम्मानजनक जिंदगी जी रहे हैं. इस कैफे में पेस्ट्री से पास्ता तक सब कुछ मिलता है जिसे लोग ऑनलाइन आर्डन करके भी मंगा सकते हैं, 12 सदस्यीय इस कैफे टीम में लोगों को उनके कौशल के आधार पर काम बांटे गए हैं
वहीं एनजीओ के सचिव और सह-संस्थापक सरबानी दास रॉय बताते हैं कि हमने अपने कैफे में इन महिलाओं को अपनी गति से काम करने की छूट दे रखी है जो कि एक बड़ी बात है यही वजह है कि शायद वे इस काम का आनंद ले रहे हैं.
क्रस्ट एंड कोर कैफे में एक स्टार वर्कर हरिप्रिया ने अपनी पिछली जिंदगी को याद करते हुए बताया कि एक साल पहले अपनी तमाम मुश्किलों से जूझते हुए वह हार मान चुकी थी और नहीं जानती थी कि अगला पल उनके लिए क्या बदलाव लाना वाला है.
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हरिप्रिया के चाचा  उन्हें महाराष्ट्र से इस नए शहर में लेकर आए और फिर उन्हें छोड़ दिया. पिछले साल न्यू मार्केट के पास एक बेंच पर पुलिस टीम को मिली जिसके बाद वो इस एनजीओ के संपर्क में आई है और आज इस कैफे का हिस्सा बनकर खुश हैं.
सिर्फ हरिप्रिया ही नहीं फरवरी मे शुरू हुए इस क्रस्ट एंड कोर कैफे ने ऐसी ही 11 लड़कियों की जिंदगी बदलने का काम किया