Bhopal Gas Tragedy 1984 : 34 साल बाद भी नहीं भूल सकते वो रात,आज भी दर्द से कराह रहा है शहर

Bhopal Gas Tragedy 1984

Bhopal Gas Tragedy 1984 : कुछ ही घंटों में हजारों लोग इस गैस की भेंट चढ़ गए.

Bhopal Gas Tragedy 1984 : साल 1984, दिसंबर के महीने की दूसरी रात थी और कड़कड़ाती ठण्ड…पूरा भारत जिस वक़्त सो रहा था ठीक उसी दौरान भोपाल में कुछ ऐसा हुआ जिसने दुनियाभर में तहलका मचा दिया.

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उस गैस हादसे की जो आज भी औद्योगिक दुनिया का सबसे बड़ी त्रासदी मानी जाती है. हादसे से निकली ज़हरीली गैस का असर आज भी  लोगों को चैन की साँस नहीं लेने दे रहा है.
जानिए कैसे हुआ है हादसा 
उन दिनों तकनिकी कमियों के कारण फैक्ट्री का काम बंद था और यूनियन कार्बाइड के प्लांट नंबर ‘सी’ में टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाईल आइसोसायनाइड गैस के सिलिंडर रखे थे.
2 दिसंबर की देर रात पानी का एक पाइप फट गया और पानी सीधा जहरीली मिथाईल आइसोसायनाइड गैस में जा मिला.
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देखते ही देखते इस गैस ने इतना दबाव बना दिया कि सिलिंडर फट गए और जहरीली गैस ने फैलना शुरू कर दिया.
अगली सुबह जिस वक़्त लोग सोकर भी नहीं उठे थे ये जहरीली मिथाईल आइसोसायनाइड गैस आस-पास के इलाकों में फ़ैल चुकी थी,कुछ लोग तो सुबह उठे ही नही और रात के सोए  हमेशा के लिए सोते ही रहे गए.

Bhopal Gas Tragedy

अगले तीन दिन तक मौत की गैस ने किया तांडव 
मिली जानकारी के अनुसार उस दिन 40 टन मिथाईल आइसोसायनाइड गैस प्लांट से लीक हुई थी जिसकी वजह से 5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए और अगले तीन दिनों तक भोपाल समेत आस-पास के इलाकों में मौत का तांडव यूं ही चलता रहा.
हर एक सेकंड हो रही थी किसी न किसी की मौत 
3 दिसंबर 1984 की सुबह जब लोग उठे तो सभी की आँखों में दर्द था और हर कोई यह सोच रहा था कि आखिर हुआ क्या लेकिन इससे पहले कोई कुछ समझता लोगों की मौत होने लगी और करीब 22 हज़ार लोग इस गैस की भेंट चढ़ गए.
इतना ही नहीं 20000 लोगों को इस गैस ने अपाहिज बना दिया और  अनेकों जानवर भी इसकी चपेट में आकर मौत की नींद सो गए.

Bhopal Gas Tragedy

कौन था इसका जिम्मेदार ? 
फैक्ट्री के संचालक वॉरन एंडरसन को इस घटना का मुख्य आरोपी बनाया गया लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण वो कभी सामने ही नहीं आया .
बता दें 2014 में वारेन की मौत हो गयी थी , जब हादसा हुआ उसके बाद वारेन प्लांट पर आया लेकिन कुछ ही देर में अपने शुभचिंतकों की मदद से वह अमेरिका चला गया और कहा जाता है कि वो उसके बाद फिर कभी नहीं आया .
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आज भी भोपाल ले रहा है खौफ के साय में सांसे 
गैस कांड को 34 साल हो गए हैं लेकिन अभी भी इसके प्रभाव से भोपाल मुक्त नहीं है, कई बच्चों में कमजोरी, अविकसित शरीर जैसी कई बिमारीयां जन्म से हैं और आज भी वहां पैदे होने वाले अनेक बच्चे किसी ना किसी रूप से शारीरिक या मानसिक रूप से पीड़ित हैं .
सरकार अभी तक भोपाल की आवाम को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दे पाई है,हम अपनी ओर से इस हादसे में पीड़ित हर व्यक्ति को सांतवनाएं देते हैं और सभी मृत जानो को भावनात्मक श्रद्धांजलि भी अर्पित करते हैं.
उम्मीद है जल्द भोपाल सुरक्षित होगा और लोगों को पूर्ण रूप से न्याय मिलेगा.

 

 

 

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