विस्तार से समझें क्या है सिटीजनशिप बिल,पूर्वोत्तर राज्यों में क्यों हो रहा है इसका विरोध ?

Citizenship Amendment Bill 2016
PC - North east Today

Citizenship Amendment Bill 2016 : सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा की व्याख्या फिर से करना चाहती है.

Citizenship Amendment Bill 2016 : बीते कुछ दिनों से देशभर के न्यूज़ चैनलों और अख़बारों में Citizenship Bill की चल रही ख़बरों को तो हम सबने ही देखा और सुना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल में ये सिटीजनशिप बिल होता क्या है?

आखिर इसे लेकर देशभर में इतना विवाद क्यों चल रहा है? खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में….
पहले जान लीजिये क्या होता है सिटीजनशिप बिल?
इस बिल के तहत सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 के माध्यम से अवैध घुसपैठियों की परिभाषा की व्याख्या फिर से करना चाहती है.
बताते चलें कि इस विधेयक के अधिनियम 1955 में संशोधन कर बांग्लादेश, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान से आये हिन्दू, बौध, पारसी, सिख, जैन और इसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.
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इसके अलावा इस विधेयक में भारत में रहकर लगातार 11 साल की समय सीमा को घटाकर 6 साल की समय सीमा की शर्त का भी प्रावधान किया गया है.
अब यहाँ ये जान लीजिये कि इसके विपरीत नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.
जानकारी: इस विधेयक में फिलहाल इन तीनों देशों में किसी भी तरह का उत्पीड़न का शिकार हुए मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. 
Bharat Ratna 2019
क्यों चल है इस बिल पर विवाद? और भूपेन हजारिका तक कैसे पहुंची इसकी आग?
दरअसल मशहूर गायक भूपेन हजारिका को इस साल मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया है लेकिन अब ये सम्मान सिटिजनशिप बिल को लेकर लगी आग में झुलसता नज़र आ रहा है.
बताया जा रहा है कि भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने अपने पिता को दिए गए भारत रत्न को लेने से साफ़ इनकार कर दिया है.
इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि अमेरिका में रह रहे भूपेन के बेटे तेज हजारिका ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि, “मुझसे पूछा जा रहा है कि मेरे पिताजी को दिया गया भारत रत्न में स्वीकार करूँगा या नहीं? तो मैं उन लोगों को बता दूं कि इस बात से जुड़ा मुझे अबतक कोई भी निमंत्रण मिला ही नहीं है. ऐसे में स्वीकार-अस्वीकार करने की बात तो उठती ही नहीं है.”
आगे तेज हजारिका ने लिखा है कि, “दूसरी बात, केंद्र सरकार ने मेरे पिता जी को ये सम्मान देने में जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई है और उन्होंने इसके लिए जो समय चुना है वह और कुछ नहीं बस लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका है.”
ऐसे में पूर्वोत्तर के लोग नागरिकता बिल के विरोध में सड़कों पर है. उनके ‘हीरो’ को भारत रत्न देना सवाल खड़े करता है.
अब यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है जबकि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर इसके विपरीत काम को अंजाम दे रहा है.
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के तहत 24 मार्च 1971 से भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी धर्म के लोगों को सामने लाकर उन्हें वापस उनके देश भेज देना है.
ऐसे में अब अगर नागरिकता संशोधन विधेयक पास होता है तो मुसलमानों के अलावा तो किसी और धर्म के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा.
अगर ऐसा हो जाता है तो इसके बाद अन्य देशों से आकर भारत में रह रहे सभी गैर-मुस्लिम भारत की नागरिकता के लिए योग्य हो जाएंगे और फिर उन्हें वापस नहीं भेजा जा सकेगा.
Citizenship Amendment Bill 2016
PC -Alzazeera
नार्थ ईस्ट में हो रहा है भारी विरोध
मिजोरम के मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट के मुखिया जोरमथांगा ने इस मुद्दे पर बात करते हुए स्पष्ट कहा है कि, “यह बिल हमारे लिए खतरनाक और हानिकारक है.” सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा के साथ अपने गठबंधन को लेकर भी चेतावनी जारी कर दी है. 
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असम में बीजेपी की गठबंधन पार्टी असम गण परिषद इस बिल को स्वदेशी समुदाय के लोगों के सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ बताती है.
नार्थ ईस्ट में इस बात को लेकर विरोध इसलिए भी बरपा है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि ये बिल 1985 के ऐतिहासिक असम करार के प्रावधानों का उल्लंघन करता है जिसके मुताबिक 1971 के बाद बांग्लादेश से आए सभी अवैध विदेशी नागरिकों को वहां से निर्वासित किया जाएगा भले ही उनका धर्म कुछ भी हो.
ज्ञात रहे कि 26 जनवरी को मिजोरम के सबसे बड़े स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन MZP (Mizo Zirlai Pawl) की अगुवाई में नागरिकता बिल के विरोध में एक जबरदस्त आन्दोलन भी किया गया था जिसमें तकरीबन 30 हज़ार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था.
इस प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ‘Hello China, Bye Bye India‘ जैसे नारे भी लगाये थे.