बिहार से तिहाड़ जाने वाले कन्हैया कुमार CPI दफ्तर जाकर रूके, जानिए पूरा सफर

CPI Elected Kanhaiya Kumar

CPI Elected Kanhaiya Kumar : CPI ने कन्हैया कुमार को राष्ट्रीय परिषद की टीम में दी जगह 

CPI Elected Kanhaiya Kumar : कुछ दिनों पहले तक सिर्फ एक कॉलेज छात्रसंघ का अध्यक्ष और आज हिंदुस्तान की राजनीति के भविष्य बन चुके कन्हैया कुमार का प्रमोशन हो गया है.

दरअसल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने अपनी राष्ट्रीय परिषद में जवाहर लाल नेहरू के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार को जगह देना का फैसला किया है.
यानि की अब कन्हैया सीधे तौर अपनी लेफ्ट पार्टी सीपीआई की नीतियों का फ्रंट में आकर प्रचार – प्रसार करेंगे.
बता दें कि कम समय में भारतीय राजनीति में खुद की पहचान बना चुके कन्हैया कुमार के नेता बनने की शुरूआत काफी विवादास्पद रही है.
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आखिर कौन है ये कन्हैया कुमार
बिहार के बेगुसराय जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे कन्हैया कुमार ने आज युवा नेता के रूप में खुद की एक खास पहचान बना चुके हैं.
वह अखिल भारतीय छात्र परिषद (AISF) जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का स्टूडैंट विंग है के नेता हैं जिन्हें 2015 में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए भी चुना गया था.
कन्हैया की राजनीतिक जिंदगी में उस समय एक बड़ा मोड़ आया जब फरवरी 2016 में जेएनयू कैंपस के अंदर कुछ कश्मीरी अलगाववादी छात्रों ने 2001 में भारतीय संसद पर हमले के दोषी, मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी के खिलाफ एक मार्च निकाला था जिसमें उन्होंने कई राष्‍ट्रविरोधी नारे भी लगाए.
इस मामले के तुल पकड़ते ही दिल्ली पुलिस ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके कुछ साथियों पर देशद्रोह का मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया.
लेकिन राष्ट्र विरोधी नारों में भाग लेने का पुलिस द्वारा कुमार का कोई सबूत प्रस्तुत न करने के कारण 2 मार्च 2016 को कोर्ट द्वारा उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया.
कन्हैया कुमार का देशद्रोही के मामले में जेल जाना और फिर जमानत पर वापस आना ही उन्हें समान्य व्यक्ति से काफी खास बना दिया जिसके बाद वो रातों रात प्रसिद्धी की नई उंचाईयों पर पहुंच गए.
इसके बाद उन्होंने जिस तरह गरीबी, बेराजगारी, सांप्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ सरकारों को घेरना शुरू किया उससे देश का नौजवान धीरे धीरे उनसे काफी प्रभावित होने लगा.
कन्हैया की किताब बिहार टू तिहाड़
कन्हैया कुमार को दिल्ली पुलिस ने  भले ही छोड़ दिया लेकिन जेएनयू के कुलपति द्वारा गठित एक अनुशासन समिति ने इस विवादास्पद घटना के जांच में कन्हैया को दोषी माना.
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कन्हैया कुमार और सात अन्य छात्रों को अकादमिक तौर पर वंचित कर दिया गया.

गौरतलब है कि अभी हाल ही में कन्हैया कुमार ने अपने जीवन के संघर्षों पर आधारित एक किताब लिखी है जिसका नाम उन्होंने बिहार टू तिहाड़ रखा है.

इसमें कन्हैया ने अपने जीवन के उन पहलुओं पर लिखा है कि कैसे एक छात्र अच्छी पढ़ाई का कपना लिए जेएनयू जैसे प्रसिद्ध संस्थान में पढ़ने के लिए आता है और फिर वहां किस तरह अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत करता है.
इसमें उन्होंने अपने जिंदगी के उन दिनों पर भी विस्तार से बात की जिसमें उनपर देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में बंद कर दिया गया था.
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खुद को गरीब का बेटा बताते हैं कन्हैया
 कन्हैया कुमार के पिता, जयशंकर सिंह, को पैरालिसिस है और वे काफी सालों से बिस्तर पर ही रहते हैं. उनकी माता मीना देवी, एक आंगनवाडी कार्यकर्ता हैं और उनके बड़े भाई प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं.
कन्हैया की पढ़ाई बरौनी के आरकेसी हाई स्कूल में हुई, अपने स्कूल के दिनों में कन्हैया अभिनय में रूचि रखते थे और इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य भी थे.
2002 में कन्हैया ने पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया, जहां से उनके छात्र राजनीति की शुरुआत हुई. पटना में अध्ययन के दौरान, कन्हैया ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के सदस्य बने और भुगोल से पोस्ट ग्रेजूएशन खत्म करने के बाद जेएनयू (दिल्ली) में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी के लिए एडमिशन ले लिया.
कन्हैया अक्सर अपने भाषण में खुद को पिछड़ा जिला और गरीबी में जूझते हुए पढ़ाई करने वाला छात्र बताते हैं.
वो कहते हैं कि वो इस देश के गरीब, पिछड़े और दलित के हक में आवाज उठाने के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी परेशानी क्यों ना झेलना पड़े.

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