बीजेपी के अंदर गहराते दलित मुद्दे की आग को क्या चाणक्य की कोई रणनीति बुझा पाएगी

General Caste Protest SC/ST Act Amendment

Dalit Bjp Mp Issues : बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने करी पहल

Dalit Bjp Mp Issues : एससी/एसटी एक्ट को लेकर सिर्फ समाज में ही नहीं अब तो राजनीतिक पार्टियों के अंदर भी विवाद बढ़ना शुरू हो गया है.

सत्ताधारी बीजेपी पार्टी के अंदर बीते 2-4 दिनों से दलित नेताओं ने अपनी हालत को लेकर विरोध करना शुरू कर दिया है.
बता दें कि शुरू में एक दलित सांसद द्वारा उठाई गई इस आवाज में अब तक 4 राजनेताओं ने खुले तौर पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध जताया है.
बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने करी पहल
पार्टी के अंदर दलित मुद्दे को लेकर इस विरोध की शुरूआत बहराइच की सांसद सावि​त्री बाई फुले ने सर्वप्रथम किया है. उन्होंने एससी, एसटी एक्ट को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने का काम किया है.
गौरतलब है कि 1 अप्रैल को सावित्री बाई फुले ने लखनऊ में एक विशाल रैली में कहा था कि अगर आरक्षण से छेड़छाड़ हुई तो वह बर्दाश्त नहीं करेंगी.
अपने भाषण में उन्होंने आगे कहते हुए कहा कि अगर आरक्षण ख़त्म हुआ तो कोई दलित कभी विधायक और सांसद नहीं बन सकेगा.
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सावित्री के बाद छोटेलाल ने उठाया मुद्दा
सावित्री के मुखर तेवर से प्रेरणा लेते हुए बीजेपी के रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल ने भी अपनी पार्टी में दलित मुद्दे को उठाया.
उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पीएम को पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि सपा सरकार के दौरान जब गुंडा राज चल रहा था, तब उन्होंने अपने भाई और आदिवासी दलित नेता जवाहर खरवार को चंदौली में नौगड़ ब्लॉक का प्रमुख पद जिताया था
लेकिन आज अपनी ही सरकार में उनके भाई को ब्लॉक प्रमुख पद से हटाने की साजिश हो रही है.
उन्होंने पूरा मामला समझाते हुए कहा कि ये पूरा मसला दो महीने पूर्व का है जब 9 मार्च को हुए चुनाव में भूमाफिया, गुंडे की पत्नी को ब्लॉक प्रमुख के पद पर बिठा दिया गया. जबकि उनके उम्मीदवार को इसलिए नहीं बैठाया गया क्योंकी  उन्होंने सामन्य सीट पर दलित को प्रमुख बनाया.
इस संबंध में वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय से भी मिले, जो चंदौली से सांसद हैं. इसके अलावा वो दो बार संगठन महामंत्री सुनील बंसल से भी मिले यही नहीं वह क्षेत्रीय अध्यक्ष से लेकर जिला अध्यक्ष तक से गुहार लगाई और प्रभारी मंत्री से भी मिले, लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की.
वहीं इस वाक्ये के छोटेलाल के बाद सांसद अशोक दोहरे ने भी पार्टी में इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई है.
कोर्ट में दलित प्रतिनिधि ना होने का उठा मुद्दा
पार्टी में दलित मुद्दे को लेकर माहोल पहले से गर्म था ही इस पर नगीना लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने इसे और गर्म कर दिया है.
इन्होंने पीएम को पत्र लिखते हुए कहा कि कोर्ट में हमारे समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं है, इसी वजह से अदालतें हमारे खिलाफ नए-नए फैसले देकर दलितों के अधिकारों को खत्म कर रही हैं.
इसके साथ ही उन्होंने ये भी लिखा कि जब मैं सांसद चुनकर आया था तब मैंने आपसे मिलकर प्रमोशन में आरक्षण के लिए बिल पास कराने का अनुरोध किया था. ले
किन चार साल बीत जाने के बाद भी इस देश में करीब 30 करोड़ दलितों के लिए कोई बिल पेश नहीं हुआ. आमलोगों से लेकर बीजेपी दलित सांसद भी समाज की प्रताड़ना के शिकार हैं.
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विपक्ष का बीजेपी पर उंची जातियों का पक्ष लेने का आरोप
गौरतलब है कि अक्सर विरोधी पार्टीयां भाजपा पर संवर्ग जातियों का पक्षकार बनने का आरोप लगाती रहती हैं.
उनका ऐसा मानना है कि बीजेपी सिर्फ उंची जातियों क लोंगों की ही सरकार है इसमें दलितों के किसी भी मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया जाता है.
हालांकी 2014 लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री और खुद पार्टी के अध्यक्ष हर तरह से दलितों का भरोसा जीतने के लिए हर तरह के प्रयास करते हैं, यहीं नहीं इन्होंने बाबा साहब अंबेडकर का भी नाम भुनाते हुए कई परियोजनाओं की शुरूआत उन्हीं के नाम पर करी है.
लेकिन बीचे कुछ दिनों से पार्टी के अंदर और बाहर चल रहे दलित विरोध को लेकर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत पड़ती दिख रही है.
बहरहाल अब देखना है कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी कौन सा रास्ता इख्तियार करने वाले हैं.