गरीब सवर्णों को 10 % आर्थिक आरक्षण मिलना कितना है संभव ? जरूर जान लीजिए

Economically Weaker Upper Castes Reservation
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Economically Weaker Upper Castes Reservation : नरसिम्हा राव सरकार ने भी करी थी ऐसी ही घोषणा

Economically Weaker Upper Castes Reservation : केंद्र सरकार ने कल यानी की सोमवार को अपनी कैबिनेट मीटिंग में सामान्य श्रेणी को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मंजूरी दे दी है.

हो सकता है आपको ये खबर कल ही पता चल गई होगी लेकिन यहां बड़ा सवाल अब भी है की आखिर सरकार ऐसा करेगी कैसे ?
ये सवाल उठना भी लाजमि है क्योंकी ये पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने इस तरह सामान्य श्रेणी को आरक्षण देने की बात कही है, इससे पहले भी कई सरकारों ने ये कोशिश की थी लेकिन उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.
कुछ राजनीतिक जानकार तो प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले को लोकसभा से पहले सर्वणों को लुभाने का चुनावी अस्त्र मान रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने बीबीसी हिंदी से कहा, “मेरे हिसाब से यह आकाश में एक विशाल चिड़िया की तरह है जो चुनावी मौसम में आएगी. शायद सरकार इस तथ्य को स्वीकार कर चुकी है कि न्यायालय इसे गिरा देगा लेकिन अगली सरकार के लिए इस मुद्दे से निपटना मुश्किल होगा. अभी यह करोड़ों बेरोज़गारों को सपने बेच रहे हैं.”
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किन लोगों को मिल सकता है इस आरक्षण का लाभ
1.जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है
2. जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है
3. जिसका 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है.
4. कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को
5.राजपूत,ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा
देश की 95 प्रतिशत आबादी आ जाएगी आरक्षण के सर्कल में ?
अगर मोदी सरकार इस बिल को दोनों सदनों में पास कराने में सफल रही और ये देश भर में लागू हो गया है तो भारत की लगभग 95 प्रतिशत आबादी आरक्षण के दायरे में आ जाएगी.
इसे इस तरह से समझें एनएसएसओ सर्वे 2011-12 के मुताबिक एक महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय 2,625 रुपये है और शहरी क्षेत्रों में यह 6,015 रुपये के करीब मानी गई थी.
अगर इस आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण यदि लागू होता है तो अधिक आय वर्ग के ऊपर के सिर्फ 5 फीसदी परिवार ही इस दायरे से बाहर होंगे.
वहीं 2016-17 में सिर्फ 23 मिलियन लोगों ने ही अपनी आय 4 लाख से अधिक घोषित की है इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं की कितनों की कमाई 8 लाख सलाना से ज्यादा होगी.
Economically Weaker Upper Castes Reservation
कैसे मुमकिन है आरक्षण देना
अगर मोदी सरकार सच में इस आरक्षण को देना चाहती है तो सबसे उसे संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन करना होगा.
इसके बाद इस संशोधित बिल को लोकसभा और राज्यसभा दोनों की मंज़ूरी आवश्यक होगी.
बता दें की भारतीय संविधान के अनुसार किसी को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, आरक्षण सिर्फ सामाजिक और जातिगत पिछड़ेपन लोगों को ही देने का प्रावधान है.
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वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता है.
फिलहाल अभी देश में कुल 49.5 फ़ीसदी आरक्षण है. अन्य पिछड़ा वर्ग(OBC) को 27 फ़ीसदी, अनुसूचित जातियों(ST) को 15 फ़ीसदी और अनुसूचित जनजाति(SC) को 7.5 फ़ीसदी आरक्षण की व्यवस्था है.
बताया जा रहा है कि ग़रीब सवर्णों को प्रस्तावित 10 फ़ीसदी आरक्षण मौजूदा 50 फ़ीसदी की सीमा से अलग होगा.
आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है.
पहले भी हुई थी कोशिश
ज्ञात हो पी.वी नरसिम्हा राव की सरकार ने भी अपने कार्यकाल में मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी.
लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने खारिज कर दिया था.
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file photo
विपक्ष ने प्रधानमंत्री को दिया समर्थन का भरोसा
मोदी सरकार के इस फैसले को लेकर जहां सविधान जानकार इसे चुनावी तंत्र बता रहे हैं तो वहीं विपक्ष में इसे उनके साथ है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री से लेकर देश की बडे विपक्षी दल कांग्रेस ने उन्हें इस बिल पर समर्थन देने की बात कही है.
हालांकी उन्होंने ये भी संशय जाताया है की लोकसभा चुनाव से पहले सरकार काइस तरह का फैसला संवणों के हित कम चुनावी एजेंडा ज्यादा लग रहा है.
गौरतलब है की अभी हाल में हुए तीन बड़े हिंदी भाषी क्षेत्रों में बीजेपी को संवर्णों की नाराजगी का सामना करना पड़ा था जिसका खामिया उसने अपनी हार से भुगत लिया