जानिए क्या होती है ‘आचार संहिता’ और क्यों इसे हर चुनाव से पहले लागू किया जाता है

Election Code Of Conduct

Election Code Of Conduct : 11 अप्रैल को होगा पहले चरण का चुनाव

Election Code Of Conduct : जैसा की आप सभी को अब तक पता चल ही गया होगा की लोकसभा 2019 चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा चुका है.

7 चरणों में होने वाले ये आम चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 अप्रैल तक चलेंगे और अंत में 23 मई को नतीजे पूरे देश के सामने रख दिए जाएंगे.
बता दें की चुनाव आयुक्त द्वारा इसकी घोषणा करने के बाद से ही देशभऱ के अंदर आचार संहिता लागू हो गई है.
अक्सर आप सोचते होंगे की ये आचार संहिता क्या होती है और क्यों इसे किसी भी चुनाव से पहले लागू कर दिया जाता है.
हममें से कई लोगों को इसके बारे में जानकारी होगी लेकिन अब भी कुछ होंगे जिन्हें आचार संहिता के बारे में नहीं पता होगा.

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दरअसल संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग के कुछ नियम- कानून हैं उन्हें ही आचार संहिता कहते हैं.
इन नियमों का पालन चुनावी उम्मीदवारों को ना सिर्फ अपने भाषणों में करना होता है बल्कि सभी प्रकार के चुनावी प्रचार और यहां तक कि उनके घोषणापत्रों में भी करना होता है.
Election Code Of Conduct
इसके लागू होते ही शासन और प्रशासन में कई अहम बदलाव हो जाते हैं, आइए जानते हैं इन नियमों के कुछ विशेष अंश
1.आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन यानी सरकारी पैसे का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक आयोजन में नहीं किया जा सकता.
2. सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी बंगला का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है.
3. आचार संहिता लगने के बाद सभी तरह की सरकारी घोषणाएं, लोकार्पण, शिलान्यास या भूमिपूजन के कार्यक्रम नहीं किए जा सकते हैं.
4. किसी भी पार्टी, प्रत्याशी या समर्थकों को रैली या जुलूस निकालने या चुनावी सभा करने की पूर्व अनुमति पुलिस से लेना अनिवार्य होता है.
5. राज्यों और केंद्र सरकार के कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव आयोग के कर्मचारी की तरह काम करते हैं.
6. कोई भी राजनीतिक दल जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं से वोट नहीं मांग सकता है.
7. वोटरों को किसी तरह का रिश्वत या लालच नहीं दिया सकता साथ ही प्रदर्शन और अनशन भी प्रतिबंधित होगा.
नियम तोड़ने पर होती है कठोर कार्यवाही
बता दें की सदस्यों द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग द्वारा कठोरात्मक कार्यवाही की जाती है.
ऐसा करने वालों को चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, यहां तक की उसपर आपराधिक धाराएं भी दर्ज की जा सकती हैं.यही नहीं इसके उल्लंघन के मामले में जेल जाने तक के भी प्रावधान है.