पद छोड़ने के बाद भी नहीं रुक रही पूर्व CBI निदेशक आलोक वर्मा की मुश्किलें

Former CBI Chief Alok Verma

Former CBI Chief Alok Verma : पहले ही प्रयास में पास कर ली थी संघ लोक सेवा परीक्षा

Former CBI Chief Alok Verma : सीबीआई निदेशक के पद से हटाए गए आलोक वर्मा की मुश्किलें अब भी थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं.

ख़बरों के मुताबिक अब सीवीसी जांच के अलावा रिश्तेदारों के साथ-साथ आलोक वर्मा के परिवार पर भी शिकंजा कसा जा सकता है., यानी की इससे साफ है की अब उनकी परेशानी और बढ़ने वाली.
सिर्फ इतना ही नहीं, आलोक वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान कितनी जांचों को प्रभावित किया था और तिहाड़ जेल का डीजी रहने के दौरान उनके लंबित मामले क्या-क्या थे, अब इसकी भी जांच केन्द्र सरकार कराएगी.
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि इस मामले से सम्बन्धित एक पत्र सीवीसी और डीओपीटी को भेजा दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि आलोक वर्मा ने अपने रिश्तेदारों सहित पत्नी और जानकारों को क्या-क्या फायदे पहुंचाए और उनके नाम कितनी बेनामी संपत्ति है.
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इसके अलावा सूत्रों के अनुसार आलोक वर्मा पर आनेवाले दिनों में आयकर की जांच का शिकंजा भी कसा जा सकता है.
ये बात तो सभी जानते है कि हाल में आलोक वर्मा को हाईपावर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बैठक कर निदेशक के पद से हटा दिया था और उनका तबादला कर दिया था, जिसके बाद आलोक वर्मा ने रिटायरमेंट का आवेदन कर दिया.
हालाँकि लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को हटाए जाने के खिलाफ खड़े नज़र आ रहे हैं. इस संदर्भ में मल्लिकार्जुन खड़गे ने समिति को अपना विरोध पत्र भी सौंपा था.
बता दें की आलोक वर्मा का सीबीआई में कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा था, लेकिन
देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से हटाए जाने पर उन्होंने पहले ही भारतीय पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ले लिया.
पहले ही प्रयास में पास करी थी संघ लोक सेवा परीक्षा
आलोक कुमार वर्मा ने 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी और वह केंद्र शासित प्रदेश कैडर के 1979 बैच के सबसे युवा अधिकारी थे.
दिल्ली पुलिस में करीबी रहे उनके दोस्त और कमर्चारियों ने बताया की आलोक वर्मा बड़े मृदुभाषी थें
उन्होंने कहा की शायद आलोक जी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की वो इस तरह की किसी लड़ाई में कभी कूंदेंगे वो भी तब जब उनकी रिटाइर नजदीक हो.
उनकी विशिष्ट सेवा को देखते हुए आलोक जी को वर्ष 2003 में राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था.
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक फरवरी 2016 में दिल्ली पुलिस आयुक्त का पद संभालने के बाद उन्होंने पुलिस बल में सालों से बंद पड़ी पदोन्नतियों का रास्ता साफ किया और साल 2016 में दिल्ली पुलिस के 26,366 कर्मचारियों को पदोन्नति दी गयी.
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Former CBI Chief Alok Verma
समिति ने सीवीसी की रिपोर्ट के इन पहलुओं पर गौर किया
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की इस रिपोर्ट पर गौर किया की मीट कारोबारी माेइन कुरैशी के खिलाफ सीबीआई के नंबर-2 अफसर रहे राकेश अस्थाना जांच कर रहे थे.
सीबीआई इस मामले में हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना को आरोपी बनाना चाहती थी, लेकिन आलोक वर्मा ने कभी इसकी मंजूरी नहीं दी.
जांच में सीबीआई को यह भी सबूत मिले कि मोइन कुरैशी के खिलाफ की जा रही जांच को गलत ढंग से प्रभावित करने की कोशिश की गई थी. सिर्फ इतना ही नहीं इस मामले में दो करोड़ रुपए की रिश्वत लिए जाने के भी सबूत सामने आये हैं.
इस पूरे मामले में आलोक वर्मा की भूमिका काफी संदेहास्पद थी इस वजह से प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मामला बन रहा था.
सीवीसी की रिपोर्ट में रिसर्च और एनालिसिस विंग (रॉ) द्वारा पकड़े गए फोन कॉल के इंटरसेप्ट्स का भी जिक्र किया गया है. इस बातचीत में ‘सीबीआई के नंबर वन अफसर को पैसे सौंपे जाने’ की चर्चा हुई थी.
इसके अलावा गुड़गांव में एक जमीन खरीदने के मामले में भी आलोक वर्मा का नाम सामने आया था. इस डील में 36 करोड़ रुपए का लेनदेन होने का आरोप है.
लालू प्रसाद से जुड़े आईआरसीटीसी से जुड़े एक केस में भी सीवीसी ने पाया कि आलोक वर्मा ने एक अफसर को बचाने के लिए एफआईआर में जानबूझकर उसका नाम शामिल नहीं किया.

हालांकी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पटनायक ने इंडियन एक्सप्रेस की सीमा चिश्ती से कहा है कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की रिपोर्ट में जो आरोप हैं वे सही नहीं हैं.