शहरों का विकास तो छोड़िए जनाब, पहले नामकरण तो हो जाने दीजिए

Government Change Indian Cities Name

Government Change Indian Cities Name : योगी सरकार ने शुरू किया शहरों के नाम बदलने का चलन

Government Change Indian Cities Name : इस समय हर जगह सिर्फ सीएम योगी ही छाए हुए हैं, सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक हर जगह लोग उन्हीं की बात कर रहे हैं.

करें भीं क्यों ना उन्होंने काम ही ऐसा किया है,अरे भाई भला शहरों के नाम बदलना भी कोई आसान काम है. राज्य का विकास तो कोई भी मुख्यमंत्री कर सकता है मगर पुराने समय से चले आ रहे शहरों का नया नामकरण मजाक समझा है क्या.
ये तो आप सभी अब तक जान गए होंगे कि सीएम योगी ने शहरों के नाम बदलने की शुरूआत कर दी है, खासकर वो शहर जिनके नाम में किसी एक विशेष धर्म से जुड़े शब्द हैं.
सबसे पहले योगी जी ने इलहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया और फिर फैज़ाबाद का नाम बदलकर अयोध्या किया है.
मीडिया सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जल्द ही लखनऊ,आजमगढ़ और अलीगढ़ जैसे शहरों के नाम भी बदले जाएंगे.
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इन जगहों के भी बदल सकते हैं नाम 
अब जब नामकरण की रेल ने रफ़्तार पकड़ी है तो कई और शहरों के नाम बदलने की तयारी की जा चुकी है. ऐसे में अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ और आजमगढ़ का नाम आर्यगढ़ हो सकता है.
वहीं  भाजपा विधायक संगीत सोम ने मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर रखने की मांग की है, आगरा उत्तरी के विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आगरा का नाम बदलकर अग्रवन करने की मांग की है.
सिर्फ यूपी ही नही अब तो अन्य राज्यों से भी ऐसी आवाज उठने लगी है हैदराबाद से बीजेपी विधायक प्रत्याशी राजा सिंह का कहना है कि यदि तेलंगाना में बीजेपी आती है तो हैदराबाद का नाम बदलकर  भाग्यनगर कर दिया जाएगा.
इसके अलावा अहमदाबाद के उप मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा है कि अगर लोगों का समर्थन मिले तो वो राज्य के बड़े शहर अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती रख देंगे.
हालांकि इसे लेकर भी वहां विद्रोह शुरू हो चुका है वहां के आदिवासी समूह का कहना है कि इस जगह का नाम कर्णावती नहीं बल्कि असवाल रखें.

Government Change Indian Cities Name

नाम बदलने को लेकर तेज़ हुई सियासत 

नाम बदलने को लेकर महज एक दिखावा बताते हुए विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि बीजेपी सरकार देश में हिंसा फैला रही है. ऐसे में स्थानों को हिन्दुत्व की पहचान वाला नाम देने के पीछे प्रदेश सरकार की मंशा है कि भारतीय प्राचीन संस्कृति का संरक्षण किया जा सके.
विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा के सहयोगी संगठन की माने तो सरकार नामों को वापस कर रही है जिन्हें जबरन बदल दिया गया था.
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रविवार को बीजेपी सरकार द्वारा नाम बदलने की कवायत शुरू करने पर मशूहर लेखक और इतिहासकार इरफान हबीब ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारीय जनता पार्टी को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नाम भी बदल देना डाहिए क्योंकी उनके नाम में लगा शाह फारसी भाषा का शब्द है.
यह सब छोड़िए यूपी में सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर नें तो केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और प्रवक्ता शहनवाज हुसैन की भी नाम बदलने की सिफारिश कर डाली.

नया नहीं है नाम बदलने का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब ऐसे नाम बदले जा रहे हैं इससे पहले मायावती ने भी कई जगहों के नामों को बदलकर दलितों के लिए समर्पित रहे महापुरुषों के नाम पर रख था.
कासगंज को काशीराम  नगर, अमेठी को छत्रपति शाहूजी नगर मायावती ने ही किया था लेकिन उनकी सरकार के जाने के बाद नाम वापस वही हो गए जो थे.
जिन जगहों के नए नाम रखे गए थे उनको लेकर  2012 में आयी सपा सरकार ने फैसला  सुनते हुए नए नामों को बर्खास्त किया था.
फ़िलहाल, देखना यह है कि सरकार सिर्फ नाम बदलेगी या कुछ काम भी होगा, लगातार अपने ही क़दमों के चलते विवादों में घिरती मोदी सरकार के लिए 2019 का चुनाव काफी कठिन होगा…
ऐसा हम नहीं बल्कि चुनावी नतीजे बता रहें 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद बीजेपी लोकसभा की 10 सीटे उपचुनाव में हार चुकी है.

नाम बदलने से क्या होगा ?

हमारी भारतीय राजनीति में प्रचीन स्थलो, शहर,सड़कों का नाम बदलना एक फैशन सा बन गया है. कोई भी पार्टी जब सत्ता में आती है तो सबसे पहले काम नामकरण और नाम बदलना ही करती है.
दरअसल यहां गलती इन पार्टीयों की नहीं बल्कि हमारी है क्योंकी हमें विकास बाद में चाहिए अपना धर्म और जाति के बारे में पहले सोचना है.
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अगर सामने वाला हमारी जाति या धर्म के लिए अच्छा काम करता है तो चुनाव में हमारी हाथ की ऊंगली उसी के चुनाव चिन्ह के पास जाकर रूकेगी,चाहे उसने अपने कार्यकाल में सिर्फ नाम बदलने का ही काम क्यों ना किया हो.
मगर यहां हम ये क्यों नहीं सोचते कि क्या नाम बदलने से लोग उस शहर,गांव या स्टेशन को ज्यादा तवज्जो देने लगेगें.
इतिहास गवाह है आज भी लोगों के जुबान पर किसी भी जगह का पुराना नाम ही रहता है. अगल विश्वाश ना हो तो थोड़ा समाज के बीच जाकर आज मा लीजिएगा.