घाटी में ‘जमात-ए-इस्लामी’ पर कसा शिकंजा तो सड़क पर विरोध में उतरीं महबूबा मुफ्ती

Kashmir Jamaat-e-Islami Ban
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Kashmir Jamaat-e-Islami Ban : केंद्र सरकार के आदेश पर जमात-ए-इस्लामी संगठन पर बैन लगाया गया

Kashmir Jamaat-e-Islami Ban : जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी की नेता महबूबा मुफ्ती राज्य के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर लगाए गए बैन के खिलाफ सड़क पर उतर आई हैं.

ये कोई नया नहीं है केंद्र सरकार द्वारा जमात-ए-इस्लामी संगठन पर बैन लगने की खबर के बाद से ही वह पीडीपी के वर्कर्स के साथ मिलकर प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं.
बता दें कि गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत जमात-ए-इस्लामी संगठन पर पाबंदी लगाते हुए अधिसूचना जारी की थी.
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ट्वीट कर जताया आक्रोश 
इस सन्दर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने ट्वीट कर बताया कि “लोकतंत्र में विचारों का संघर्ष होता है. ऐसे में जमात-ए-इस्लामी (जेके) पर पाबंदी लगाने की दमनात्मक कार्रवाई निंदनीय है और यह जम्मू कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे से अक्खड़ और धौंस से निपटने की भारत सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण है.”
क्यों लगायी गयी है पाबंदी?
गुरुवार को केंद्र सरकार ने इस आधार पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत जमात-ए-इस्लामी (जम्मू कश्मीर) पर पांच साल के लिए पाबंदी लगाई थी कि उसकी आतंकवादी संगठनों के साथ साठगांठ है.
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक हुई थी जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत इस संगठन पर पाबंदी लगाते हुए कश्मीर में संगठन से जुड़ी कई सम्पत्तियों को सील करने का भी फैसला लिया था.
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पुलिस ने दिया ये बयान 
इस बारे में जब स्थानीय पुलिस से बात की गयी तो उन्होंने अपने बयान में साफ़ कहा है कि, ‘जमात-ए-इस्लामी’ के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के आवास सहित कई अन्य जगहों पर छापे मारकर उनकी चल -अचल सम्पत्तियां व बैंक खाते शुक्रवार रात को सील कर दिए गए हैं.
पुलवामा हमले के बाद से ही शुरू है कार्यवाही 
 बताते चलें कि जमात-ए-इस्लामी पर देश में हो रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने और आतंकवादी संगठनों के साथ संपर्क में होने का आरोप है.
इसी बात के मद्देनजर पुलवामा में 14 फ़रवरी को सुरक्षाबलों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद से ही अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है तथा जमात-ए-इस्लामी जम्मू एंड कश्मीर के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार भी किया गया है. 
ज्ञात हो कि 22 फरवरी की रात को पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने छापेमारी की थी.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस छापेमारी में तकरीबन 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया था.
जांच में ये बात सामने आई कि हिरासत में लिए गए लोगों में से ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से ही जुड़े हुए थे. इसमें संगठन के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल थे.
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पहले भी इस संगठन के खिलाफ की जा चुकी है कार्यवाही
आपको जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने दो बार जमात-ए-इस्लामी संगठन को प्रतिबंधित किया था.
1975 में पहली बार इस संगठन पर जम्मू कश्मीर सरकार ने कार्रवाई की थी, जबकि दूसरी बार केंद्र सरकार ने इस पर 1990 में बैन लगाया था. 
संगठन ने इस बात का दावा भी किया था कि छापेमारी में डॉ. अब्दुल हमीद फयाज और वकील जाहिद अली को गिरफ्तार किया गया था.
जानकारी के मुताबिक ये संगठन पहले आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था. हाँ वो बात बेशक अलग है कि दुनिया की नज़रों में उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया है..