कावेरी जल विवाद को सुलझाने में केंद्र की देरी आखिर किस ओर कर रही हैं ईशारा, समझे यहां

Kaveri Water Dispute

Kaveri Water Dispute : अंग्रेजों के समय का है कावेरी जल विवाद 

Kaveri Water Dispute : कावेरी जल विवाद के चलते पूरा तमिलनाडु इस समय विरोध प्रदर्शन की आग में जल रहा है.

यह विरोध अब तो इतना आक्रामक हो गया है कि गुरुवार को  25 वर्षीय व्यक्ति ने खुद को आग तक लगा ली. यहीं नहीं तमिलनाडु के इस विरोध प्रदर्शन से पीएम मोदी से लेकर आईपीएल मैच तक सभी प्रभावित हो रहे हैं.
क्या है कावेरी जल विवाद
कावेरी जल विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है, यह अंग्रेजों के समय से चलता आ रहा है.हालांकी आजादी के बाद जनता को लगा कि इस मुद्दे को ठीक कर दिया जाएगा लेकिन, अभी तक उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है.
दरअसल, कावेरी के घाटी पर दो प्रमुख राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा लगती है और यही कारण है कि कावेरी के जल को लेकर दोंनों राज्यों में हमेशा बवाल होता रहता है.
1924 में अंग्रेजों द्वारा कावेरी के जल को लेकर एक समझौता भी हुआ था लेकिन कर्नाटक को इस समझौते पर एतराज हो गया क्योंकि उसका मानना था कि अंग्रेज़ों की हुकूमत के दौरान कर्नाटक एक रियासत थी जबकि तमिलनाडु सीधे ब्रिटिश राज के अधीन आता था.
इसलिए 1924 में कावेरी जल विवाद पर हुए समझौते में उसके साथ न्याय नहीं हुआ और इस कारण आज वो पानी के बंटवारे पर शोर मचा रहा है.
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आजादी के बाद भी इस मुद्दे पर हुई बात
इस मामले में 1972 में गठित एक कमेटी की रिपोर्ट के बाद 1976 में कावेरी जल विवाद के सभी चार दावेदारों के बीच एग्रीमेंट किया गया, जिसकी घोषणा संसद में हुई थी और साल 1990 में तमिलनाडु की मांग पर एक ट्रिब्यूनल का भी गठन हुआ था.
इस ट्रिब्यूनल में यह फैसला किया गया था कि कर्नाटक की ओर से कावेरी जल का तय हिस्सा तमिलनाडु को मिलेगा लेकिन बाद में कर्नाटक ने इससे भी इंकार कर दिया जिससे दोनों राज्यों के बीच हिंसा और भड़क गई.
इसके बाद फिर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को तमिलनाडु को पानी देने के निर्देश दिए मगर 2016 में भी इस मुद्दे को लेकर फिर से विरोध शुरू हो गया.
इस साल सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी को इस केस में फैसला सुनाया कि 6 हफ्तों के अंदर केन्द्र इस मामले में कोई स्थाई योजना लागू करे लेकिन समयसीमा निकल जाने पर केंद्र ने इसे 3 महीने और बढ़ाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है.
कावेरी मुद्दे को बनाया जा रहा है राजनीतिक
कर्नाटक में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनाव में वोट बैंक के लिए केन्द्र सरकार जनता को इस मामले में निराश नहीं करना चाहती इसलिए वो इसे टालने का प्रयास कर रही है.
बता दें कि गुरुवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ‘डिफेंस एक्सपो‘ में हिस्सा लेने चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे, तो एयरपोर्ट के नजदीक अलंदुर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर उनका विरोध किया. इसके साथ ही वहां की द्रमुक सहित विपक्षी पार्टियों ने भी काले झंडे दिखाकर मोदी की तमिलनाडु यात्रा का विरोध किया.
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आईपीएल को चेन्नई से किया गया रवाना
तमिलनाडु में कावेरी विवाद को देखते हुए बीसीसीआई ने चेन्‍नई में होने वाले आईपीएल मैचों को किसी दूसरे स्‍थान पर शिफ्ट करने का फैसला किया है.
दरअसल, अभी कुछ दन पहले चेन्नई में हुए आईपीएल मैच में स्टेडियम की दर्शक दीर्घा से कुछ लोगों ने बीच मैच में पानी की बोतलें और चप्पलें फेकना शुरू कर दिया था. चेन्नई में लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अब वहां की पुलिस ने भी आईपीएल को सुरक्षा मुहैया कराने से इनकार कर दिया है.
यह तो निश्चित लग रहा है कि कावेरी मुद्दे पर अगर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु के लोगों का विश्वास बीजेपी सरकार जरूर हार जाएगी.