लिव-इन पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाना रेप नहीं – सुप्रीम कोर्ट

Marriage Of Hindu Woman And Muslim Man
सुप्रीम कोर्ट

Physical Relation With Live In Partner :बलात्कार और सहमति से सेक्स के बीच साफ अंतर

Physical Relation With Live In Partner : साल 2019 के आते ही सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर प्रेम और उस दौरान बनने वाले शारिरीक संबंधों को लेकर एक बेहतरीन निर्णय लिया है .

हालांकी इस बार खबर लड़कियों के ही नहीं बल्कि लड़कों को राहत देने वाली है. 
लिवइन में रहने वालों के लिए कोर्ट का आदेश 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फै़सले में कहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद सहमति से बनाया गया शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं माना जाएगा .
कोर्ट ने इसमें माना की  पीड़िता और अभियुक्त दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे और काफ़ी समय से एक साथ रह रहे थे.
इसका मतलब यह है कि यदि लिवइन में रह रहे लड़के लड़कियों को किसी कारण अलग होना पड़ा तो लड़की ऐसे में लड़के पर बलात्कार का आरोप नहीं लगा सकती है.
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दरअसल कई बार देखा गया है कि लिवइन में रहने वाले कपल अलग हो जाते हैं और सारा दोष लड़के के माथे पर आता है.
ऐसे में लड़कों को बलात्कार तक का आरोप झेलना पड़ता है जबकी लड़कियां निर्दोष साबित हो जाती हैं. 
Physical Relation With Live In Partner
बता दें की लिवइन में रहने का मतलब दो प्रेम करने वाले शादी से पहले अपनी सहमति से एक दूसरे के साथ रहते हैं,इसमें उनके बीच शारिरीक संबंध बनने की भी गुंजाइश रहती है.
अगर आगे चलकर किसी को भी इस रिश्ते को खत्म करना रहता है तो वो आसानी से इसे कर सकता है,इसमें किकी प्रकार की कानून बाधा नहीं आती.
मगर अक्सर देखा जाता था की कई बार लिवइन रिलेशन में कपल के अगल होने के बाद लड़कियां लड़कों पर शादी का झांसा देकर रेप करने जैसे आरोप लगा देती है. 
लेकिन अब  कोर्ट के इस फैसले से उन लड़कों को राहत मिलेगी जो लड़की के अलग होने पर  भी सज़ा भुगत रहे थे.  
हालांकी ऐसे में लड़कियों को भी थोड़ा सावधान रहना होगा क्योंकि कुछ लड़के इस नियम का फायदा उठा सकते हैं . 
एक नर्स के कारण आया यह नियम 
दरअसल कुछ समय  पहले एक नर्स ने डॉक्टर पर आरोप लगाया कि उसने शादी का झांसा देकर लिवइन में रहने को कहा और अब किसी और से शादी कर रहा है, इसके बाद डॉक्टर ने कोर्ट में अपील की जिसके जवाब में यह कानून आया है.
गुरुवार को एक केस में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि बलात्कार और सहमति से सेक्स के बीच एक स्पष्ट अंतर है.
अदालत को ऐसे मामलों में  बहुत सावधानी से जांच करनी चाहिए कि क्या शिकायतकर्ता वास्तव में पीड़ित से शादी करना चाहता था या उसके पास कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा था और उसने झूठा वादा किया था ताकि वह अपनी वासना को संतुष्ट कर सके.
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गौरतलब है  की इस मामले में एफआईआर के मुताबिक एक विधवा महिला को डॉक्टर से प्यार हो गया था और वे उसके साथ रहने लगी थीं.
लेकिन कुछ महीने साथ रहने के बाद डॉक्टर ने अक अन्य महिला से शादी कर ली थी. 
इस पर पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच स्वीकार किए गए शारीरिक संबंध आईपीसी की धारा 376  (बलात्कार) के तहत अपराध नहीं होंगे.
इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में नर्स द्वारा डॉक्टर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज कर दिया