जानिए राजीव गांधी के उन 5 बड़े योगदान को जिन्हें देश भुला नहीं सकता

Rajeev Gandhi's 27th Death Anniversary

Rajeev Gandhi’s 27th Death Anniversary : इन योगदान ने भारत की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है.

Rajeev Gandhi’s 27th Death Anniversary : 21 मई 1991, यह वही दिन था जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिल नाडु के श्रीपेरंबदूर में हत्या कर दी गई थी.

1984 में अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने राजीव 1989 तक इस गद्दी पर आसीन रहे.
प्रधानमंत्री रहते राजीव के 5 साल के कार्यकाल की बात करें तो उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसनें देश को आगे बढ़ने की एक नई राह दिखाई.
हालांकि उन्हीं के द्वारा कुछ ऐसे भी निर्णय लिए गए जिनकी आलोचना आज भी होती है जैसे शाहबानो केस और अयोध्या राम जन्मभूमि मसला.
राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान ही 21वाीं सदी के भारत की नीव रख दी थी जिसका लाभ आज हम सबको मिल रहा है.
आइए जानते हैं राजीव गांधी के उन 5 बड़े योगदान को जिसने भारत की तस्वीर बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है.
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गांव की पंचायतों को दिया अधिकार
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हमेशा आम जनता को ताकतवर बनाने की बात करते थे. उनकी ज्यादातर योजनाएं कुछ व्यक्तियों पर केंद्रित ना होकर बल्कि हर व्यक्ति के उपयोग को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी.
इसी सोच को उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था में भी लागू किया. दरअसल कांग्रेस ने 1989 में एक प्रस्ताव पास कराकर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने की दिशा में कोशिश की थी, जो 1992 में नरसिम्हा राव सरकार में वास्तविकता में सबके सामने आया.
इस योजना का उद्देश्य गांव की पंचायतों को सशक्त कर उन्हें दिए गए अधिकारों को और मजबूत करना था. यही नहीं ग्रामीण बच्चों की शिक्षा स्तर को सुधारने के लिए नवोदय विद्यालय के शुभारंभ का श्रेय भी राजीव को ही जाता है.
भारत को तकनीकी युग का कराया अभास
राजीव गांधी हमेशा तकनीक के आधार पर भारत में 21वीं सदी की कल्पना करते थे, क्योंकी उन्हें विश्वास था देश के अंदर बदलाव लाने के लिए अकले तकनीक ही सक्षम है. इसके लिए उन्होंने टेलीकॉम और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में कई काम किए.
बता दें कि भारत में कंप्यूटर लाने का श्रेय राजीव को ही जाता है यही नहीं उन्होंने विदेश से पूरी तरह असेंबल किए हुए मदरबोर्ड और प्रोसेसर लाने कीअनुमित दी जिसके चलते कंप्यूटर सस्ते हुए.
ये राजीव गांधी की ही सुधारों की कोशिश थी जिससे नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी जैसे लोगों को विश्वस्तरीय आईटी कंपनियां खोलने की प्रेरणा मिली.
टैक्स प्रणाली में दिखाया उदार
राजीव ने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ सरकारी क्षेत्रों में सरकार का नियंत्रण खत्म करने की शुरूआत करी जो 1991 में बड़े पैमाने पर लागू हुआ.
राजीव ने इनकम और कॉर्पोरेट टैक्स घटाया, लाइसेंस सिस्टम सरल किया और कंप्यूटर, ड्रग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों से सरकारी नियंत्रण खत्म किया.
साथ ही कस्टम ड्यूटी भी घटाई जिससे निवेशकों को बढ़ावा मिला.इसके अलावा देश में लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने की नीव राजीव ने ही रखी थी.
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युवाओं की ताकत को समझा
युवाओं की अहमियत को समजते हुए राजीव गांधी ने मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 साल करने का फैसला किया. यही नहीं राजीव गांधी ने ही चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों के सर्वप्रथम इस्तेमाल की अनुमति दी. जिसके बाद से चुनाव प्रक्रिया में कई सुधार किए गए.
ईवीएम के आ जाने के बाद कफी हद तक चुनाव के दौरान वोटों की होने वाली धांधली पर रोक लगाई जा सकी.
विदेश नीति में दमदार छवि
1988 में अपनी पहली चीन यात्रा में राजीव गांधी ने दोनों देशों के बीच सालों से चली आ रही कड़वाहट को काफी हद तक कम कर दिया. इस यात्रा के दौरान राजीव ने चीन के साथ  साइंस, टेक्नोलॉजी और सिविल एविएशन के क्षेत्र में कई समझौते किए.
राजीव ने वहां के चीनी नेता डेंग शियोपिंग को अपनी बातचीत से काफी प्रभावित किया है. करीब 90 मिनट तक चली इस बातचीत मे डेंग ने उनसे कहा, कि तुम युवा हो, और तुम्हीं भविष्य हो. खास बात है कि डेंग कभी किसी विदेशी राजनेता से इतनी देर तक बातचीत नहीं करते थे.
इसके अलावा उन्होंने 1988 में मालदीव को श्रीलंकाई आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम(LTTE) से बचाने के लिए भारतीय सेना भेजकर एक सच्चे मित्र की भूमिका निभाई थी.
बता दें कि मालदीव के राष्ट्रपति ने इस संकट से निपटने के लिए भारत , पाकिस्तान, यूएस, ब्रीटेन और श्रीलंका जैसे कई देशों से मदद मांगी थी. मगर भारत को छोड़कर ज्यादातर देशों ने इम मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था. भारत ने ना सिर्फ मालदीव की मदद करी बल्कि पूरी तरह LTTE को वहां भगाने में भी कामयाब भी हुई.
यही वजह थी की LTTE आतंकवादियों ने राजीव गांधी को अपना दुश्मन मान लिया और उनसे बदला लेने के लिए 21 मई 1991 में मानव बम के जरिए उनकी हत्या करवा दी.