ट्रेड यूनियनों ने क्यों बुलाया भारत बंद, जानें कौन हुआ शामिल और किसने किया किनारा

Trade Union Strike Bharat Bandh
PC - Indian express

Trade Union Strike Bharat Bandh :  देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत के तुरंत 25 से 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है.

Trade Union Strike Bharat Bandh :  एक और भारत बंद, अब तो शायद आप सबको भी इसकी आदत पड़ी ही गई होगी.

कभी राजनीतिक पार्टिया,कभी आरक्षण मांगने वाले,कभी कर्मचारी संगठन तो कभी किसान आए दिन कोई ना कोई  भारत बंद का ऐलान कर ही देता है.
इस समय भी ट्रेड यूनियनों ने 8 व 9 दिसंबर यानी की दो दिवसीय भारत बंद का ऐलान किया हुआ है ,मगर यहां सोचने वाली बात है की इतने बड़े देश में आखिर इन बंदों का क्या असर पड़ता है ?
तो आपको बता दें की सीआईआई (Confederation of Indian Industry) के एक अनुमान के मुताबिक एक दिन के बंद से देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत के तुरंत 25 से 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होता है.
यही नहीं वापस सेवाएं शुरू होने के बाद भी इस नुसकान की भरपाई नहीं की जा सकती है.
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ट्रेड यूनियनों ने क्यों किया भारत बंद
दरअसल केंद्र सरकार की श्रमिक-विरोधी नीतियों के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संघों ने मंगलवार से दो दिन की देशव्यापी बंद का आह्वान किया है.
यूनियनों का आरोप है की भारत सरकार कर्मचारियों की न्यूनतम विरोधी,सामाजिक सुरक्षा,कामगारों के स्तर तथा निजी करण को बढ़ावा देना व रक्षा संबंधी मांगों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही.
संगठनों के पदाधिकारों के द्वारा बार बार उन्हें इन सबके बारे में अवगत कराने के बाद भी वो इसे अनसूना कर दे रही जिसके बाद हमें मजबूर होकर इस तरह के देशव्यापी हड़ताल का आह्वान करना पड़ा.
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इसका ज्यादा असर कम्यूनिस्ट पार्टियों के प्रभाव वाले क्षेत्र में देखने को मिला है.कुछ जगह छोटी मोटी तोड़फोड़ व झड़प की खबरें भी सामने आ रही हैं.
कौन कौन हैं शामिल
AITUC की महासचिव अमरजीत कौर ने प्रेस वार्ता में बताया की 10 केंद्रीय श्रमिक संघों व 20 करोड़ मजदूरों के शामिल होने की उम्मीद है.
महासचिव के अनुसार इस हड़ताल में दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, इस्पात, बिजली, बैंकिंग, बीमा और परिवहन क्षेत्र के लोग शामिल हो रहे हैं.
वहीं संगठनों में इस हड़ताल में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हो रहे हैं.
इसके अलावा रेल कर्मचारी अपने कार्यालयों में काला फीता बांधकर इस बंद का समर्थन करेंगे. 
हालांकी इसमें RSS के सहयोगी भारतीय मजदूर संघ हिस्सा नहीं ले रहा साथ ही केरल व्यापार और उद्योग समन्वय मंचों ने भी इसका विरोध किया है.
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क्या होता है हड़ताल या बंद
दक्षिण एशियाई देशों में सरकारी या फिर प्राइवेट कंपनियों व संस्थानों की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर असंतोष जताने का तरीका है हड़ताल.
इस दौरान हड़ताल करने वाला कर्मचारी या संगठन के लोग अपने संस्थानों में कोई भी काम नहीं करते.
हालांकी कई बार देखा गया है की ये हिंसक भी हो जाता है जिसमें करोंडों के आर्थिक या जन माल का नुकसान भी हो जाता है.
भारत में संविधान की धारा 19 के तहत राइट टू प्रोटेस्ट मिला हुआ है, जिसे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1947 का सहारा मिलता है.