अभी इतना आसान नहीं है भगोड़े माल्या को भारत लाना, जानें क्यों ?

Vijay Mallya Extradition
File Photo(Google)

Vijay Mallya Extradition : ब्रिटेन के गृह मंत्री माल्या के प्रत्यपर्ण को दी मंजूरी

Vijay Mallya Extradition : विजय माल्या को आज भला कौन नहीं जानता होगा,देश का बच्चा बच्चा भी उसे पैसे लेकर भागने वाला अपराधी मान चुका है.

भारत के लिए खुशी की बात है की ब्रिटेन ने इस भगौडे कारोबारी के प्रत्यपर्ण की मंजूरी दे दी है.
बता दें की ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जाविद ने वहां की निचली अदालत का फैसला स्वीकार करते हुए विजय माल्या के प्रत्यपर्ण की मंजूरी दे दी है.
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया की गृह मंत्री ने सभी मामलों पर सावधानी से ग़ौर करने के बाद 3 फ़रवरी को विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण के आदेश पर दस्तख़त कर दिए है.
हालांकी खुद को भारत प्रत्यर्पित करने के ब्रिटेन सरकार के आदेश के कुछ ही घंटों बाद उसने ट्वीट कर जानकारी दी की वो इस आदेश के खिलाफ ब्रिटेन की हाई कोर्ट में अपील करेगा.
ज्ञात हो माल्या पर भारतीय बैंकों के करोड़ों रुपये बक़ाया हैं और वो साल 2016 से ब्रिटेन में हैं.
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कितना आसान है माल्या को भारत लाना
आपको बता दें की ब्रिटेन के कानून के मुताबिक इस फैसले के खिलाफ ऊपर की अदालत में अपील करने के लिए अभियुक्त को 14 दिनों का समय दिया जाता है.
जैसे की हम ऊपर माल्या के ट्वीट से अंदाजा लगा सकते हैं वो जल्दी इस फैसले के खिलाफ ब्रिटेन की हाई कोर्ट में अपील जरूर करेगा.
बीबीसी हिंदी में प्रत्यपर्ण पर लगने वाले समय को लेकर एक रिपोर्ट कवर की गई है उसी के माध्यम से हम आपको बताने की कोशिश करेंगे की भारत में माल्या को लाना अभी इतना आसान भी नहीं है.
ज़ाईवाला एंड कंपनी लीगल फ़र्म के संस्थापक सरोश ज़ाईवाला प्रत्यपर्ण को लेकर बताते हैं की विजय माल्या के पास 14 दिनों का समय है जिसके अंदर वो ब्रितानी गृहमंत्रालय के फ़ैसले को चुनौती दे सकते हैं.
अगर उनकी अपील वहां स्वीकार कर ली जाती है तो कोर्ट ऑफ़ अपील (जिसे भारत का हाईकोर्ट कहा जा सकता है) में सुनवाई होगी जिसे पूरी होने में लगभग 5-6 महीने का वक्त लग सकता है.
और अगर माल्या यहां भी केस हार जाता है तो वो इसके बाद ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई पूरी होने में कई महीने या यूं कहे की कई साल भी लग सकते हैं.
इसके बाद अगर फैसला भारत के पक्ष में आता है तब जाकर हम भगौड़े माल्या को अपने देश लाने में कामयाब रहेंगे.
सरोश आगे कहते हैं कि हालांकी क्राउन प्रौसेक्यूशन सर्विस यानी कि ब्रिटेन का अभियोजन पक्ष सुप्रीम कोर्ट में जल्दी सुनवाई की अपील कर सकता है.
लेकिन ऐसी अपील स्वीकार किए जाने की संभावना बहुत ही कम है और इसके लिए आपके पास कोई ठोस कारण होना चाहिए की आप क्यों इस केस की तत्काल सुनवाई चाहते हैं.

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भारत की सरकार तो अभी से उत्साहित
अभी माल्या भारत नहीं आया लेकिन केंद्र की मोदी सरकार इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है.
पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली ने ट्विटर पर लिखा है, ”माल्या के प्रत्यर्पण के लिए मोदी सरकार ने एक और क़दम बढ़ा लिया है जबकि विपक्ष शारदा स्कैम में शामिल लोगों के लिए एकजुट है.’
बता दें की भारत सरकार ने 1992 में प्रत्यर्पण संधि पर दोनों देशों के हस्ताक्षर के आधार पर मई 2016 में ब्रिटेन से कहा था कि माल्या को भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाए.
यहां तक की हाल में बने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत विजय माल्या का नाम देश के पहले अपराधी के रुप में भी दर्ज हो गया है, पासपोर्ट तो पहले से ही उसका रद्द कर दिया गया है.
फिलहाल माल्या अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड की ओर से जारी किए गए प्रत्यर्पण वॉरंट में ब्रिटेन के अंदर जमानत पर है.

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