18th Sanctuary Award : वन्य जीवों के संरक्षण में योगदान के लिए इन्हें मिला ‘सैंक्चुअरी एशिया’ अवार्ड

18th centuary award

18th Sanctuary Award : वाइल्डलाइफ की कई श्रेणी में दिए गए अवार्ड

18th Sanctuary Award : हाल ही में 18वीं नेशनल वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी अवार्ड मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) में संपन्न हुए.

इस समारोह में वन्य जीव के संरक्षण से जुड़े काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया . देश भर से आए नॉमिनेशन में से सिर्फ कुछ ही लोगों को अलग अलग श्रेणी में आवार्ड दिया गया.
जानकारी के लिए आपको बता दें कि यह अवार्ड समारोह सैंक्चुअरी एशिया मैजगीन द्वारा आयोजित किए जाते हैं
आइए जानते हैं कुछ विजेताओं के नाम और उनके कामों को जिसके लिए उन्हें यह आवार्ड मिला.

18th Sanctuary Award

1) के एस स्मिथ (ग्रीन टीचर आवार्ड)
1997 में शिक्षक के पेशे में आने के बाद से ही वह अपने छात्रों को प्रकृति की सुंदरता और इसकी सुरक्षा के लिए प्रेरित करती है. उन्होंने अपने स्कूल में कई प्राकृति क्लब बनाए हैं.
कोलकाता में सड़क चौड़ी करने के लिए जब परियोजना के लिए दर्जनों पेड़ों को काटने का फैसला लिया गया था तब स्मिथ ही उनके खिलाफ खड़ी हुई और कोलकाता म्यूनसिपल कमेटी के खिलाफ याचिका दायर की.

18th Sanctuary Award

2) राजवीर सिंह (स्पेशल सैंक्चुअरी टाइगर आवार्ड्स)
राजवीर पिछले 26 सालों से राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क की रक्षा कर रहे हैं. उन्होंने वन विभाग द्वारा पार्क में और उसके आसपास संचालित कुछ कुख्यात शिकारियों को गिरफ्तार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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यही नहीं उन्होंने वन विभाग और स्थानीय समुदायों ( आदिवासियों ) के बीच संबंधों को सुधारने में भी सहायता प्रदान की है.

18th Sanctuary Award

3) वाल्मीक थापड़ ( लाइफटाइम अचिवमेंट आवार्ड)
वाल्मीक पीछले 40 वर्षों से बाघों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने बाघों के संरक्षण के लिए कई लड़ाइयों का नेतृत्व भी किया है.
वह अब तक केंद्रीय और राज्य सरकारों की 150 से अधिक समितियों में सेवा भी कर चुके हैं. वर्तमान में वह राजस्थान सरकार की मदद से राज्य में बाघों के लिए विशेष रूप से काम कर रहे हैं.
उन्होंने महाराष्ट्र के प्यारे ताडोबा टाइगर रिजर्व जैसे पार्कों के पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके अलावा वाल्मीक 32 पुस्तकें और 16 डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के लेखक भी है.

18th Sanctuary Award

4) जयचंद्रन (वाइल्ड लाइफ सर्विस आवार्ड)
जयचंद्रन इस पुरस्कार को पाने वाले पांच व्यक्तियों में से एक है. वह पिछले तीस सालों से ज्यादा समय से तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में निलगिरी और सतीमंगलम लैंड्सकैप को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे है.1990 में उन्होंने तमिलनाडु ग्रीन मूवमेंट शुरू किया था.
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यही नहीं कठोर शिकारियों को पकड़ने में उन्होंने वन विभाग की मदद की और कई शिकारियों को आत्मसमर्पण करने के लिए भी प्रेरित किया.

18th Sanctuary Award

5) ज्योति शर्मा ( युवा अचिवर आवार्ड)
राजस्थान के सवाई माधेपुर में जेएसएम पब्लिक स्कूल की कक्षा 8 में पढ़ने वाली 13 साल की ज्योति को रणथंबोर नेशनल पार्क की वाइल्ड लाइफ के बारे में बहुत ज्ञान है.
वह गोवर्धन मीना द्वारा संचालित बच्चों के लिए प्राकृतिक सीरीज में एक सक्रिय भागीदार भी हैं. अपनी प्रिसिंपल की मदद के साथ अब वह दूसरे विद्यालयों में भी प्राकृतिक के प्रति बच्चों को जागरूक करने के लिए सीरीज करती हैं. ज्योति यह पुरुस्कार पाने वाली इस साल की सबसे युवा विजेता है.

साभार –  सैंक्चुअरी एशिया