10 साल बाद अब भी बदलाव लाने में लगे हैं 26/11 मुंबई हमले के ये पीड़ित

26/11 Victims Fight For National Safety Security

26/11 Victims Fight For National Safety Security : ये लोग छोटे स्तर पर ही सही लेकिन उम्दा प्रयास कर रहे हैं.

26/11 Victims Fight For National Safety Security : 26/11 की तारीख हर भारतीय के दिल में एक खौफनाक सच की तरह बसी हुई है. हर साल जब भी ये तारीख आती है एक ऐसा मंजर आंखों के सामने आ जाता है जो खून और चीखों से भरा हुआ है.

मुंबई में हुए इस हमले में कई लोगों ने अपनों को खोया है, कुछ लोग इसे बुरा सपना समझकर भूल चुके हैं तो कुछ आज भी उन यादों में जी रहे हैं.
हालांकि कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस कोशिश में लगे हैं कि हमारे देश को फिर से ऐसी स्थिति से ना गुजरना पड़े.
आज हम आपको ऐसे ही लोगों की कहानी बताएंगे जो 26/11 आतंकी अटैक में अपने परिवार को खोने को बावजूद देश को इस तरह की मुसीबत से बचाने के लिए छोटे स्तर पर ही सही लेकिन उम्दा प्रयास कर रहे हैं.
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29 साल के सरजान शाह ने 26/11 के हमले में अपने पिता और रियल एस्टेट कंपनी ग्रुप सेटेलाइट के मालिक पंकज शाह को खो दिया. पंकज को एयरपोर्ट से लौटते हुए ओबरॉय होटेल में आतंकियों ने गोली मार दी थी.
इस साल उनकी 10वीं बरसी पर बेटे सरजान ने एक थिंग टैंक बनाने का विचार किया है जो इस तरह के हमलों को समझेगा और इससे निपटने के फास्ट तरीके खोजेगा और फिर अपना फाइनल प्लान सरकार को सौंप देगा.

26/11 Victims Fight For National Safety Security

बता दें कि अपने इस थिंक टैंक के लिए पंकज ने लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के क्रिस्टोफर कोकर के अलावा दुनिया भर की बड़ी बड़ी यूनिवसर्टी के प्रोफेसरों को इससे जोड़ा है.
वहीं ऐसी ही एक कहानी 85 वर्षीय सरला की भी है जिन्होंने इस हमले में अपने बहु और बेटे को खो दिया. उनके बेटे सुनील और बहु रेशमा उस दिन रात के खाने के लिए ओबरॉय होटेल गए थे औऱ फिर कभी नहीं लौटे.
इसके बाद सरला ने अपने पति सावंति जे पारिख के साथ मिलकर अपनी दोनों पोतियों की परवरिश की. हालांकि इस हमले ने उन्हें अंदर से हिला दिया था लेकिन कुछ रोज बाद वो संभली और फैसला किया कि वह मुंबई की सुरक्षा के लिए काम करेंगी.
इसके लिए सरला ने कुछ रिटायर पुलिस अफसर और एनजीओ के साथ मिलकर इस लड़ाई की शुरुआत करी.
सबसे पहले सरला ने आरटीआई डालकर यह जानने की कोशिश करी कि आखिर शहरों की सुरक्षा में इतनी चूक क्यों है.
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इसके बाद उन्होंने मुंबई में सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए 60 करोड़ रुपए भी इकठ्टा किए हालंकि इसका कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि सरकार ने ऐसा करने पर रोक लगा दी.
सरकार के इस फैसले के खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट भी गई लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी क्योंकी वहां कोर्ट ने कहा कि ये काम सरकार का है.
लेकिन फिर भी सरला और उनके पति सेवंति ने हार नहीं मानी है और वह अब भी कहते है कि वह तब तक लड़ेंगे जब तक उनके शहर का हर इंसान सुरक्षित महसूस नहीं करता.