Acid Attack Survivor: 26 वर्षीय रिया शर्मा को मिला ग्लोबल गोल्स अवार्ड 2017

Acid Attack Victims Reservation
demo pic

Acid Attack Survivor:फैशन डिजाइनर बनने का था सपना,बन गई एसिड पीड़ितों की हमदर्द

एक ऐसी भारतीय  लड़की जो इंग्लैंड गई थी फैशन डिजाइनर बनने के लिये, लेकिन जब वो अपनी पढ़ाई कर वापस लौटी तो उसने कुछ ऐसा काम किया जो आज कई महिलाओं को राहत पहुंचा रहा है.
दिल्ली से सटे गुड़गांव में रहने वाली  रिया शर्मा आज अपने फैशन डिजाइनिंग के प्रोफेशन को छोड़कर एसिड अटैककी शिकार महिलाओं के लिए acid attack survivor सेंटर चला रही हैं.
वो उनका इलाज कराती हैं, उनकी कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद करती हैं. और सबसे खास बात ये है कि वो इन महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रेरित करती हैं
आपको बता दें कि 26 साल की रिया को इन्हीं प्रयासों के लिए इस साल ग्लोबल गोल्स अवार्ड 2017 में लीडरशिप अवार्ड से नवाजा गया है.
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा से अवार्ड लेती रिया
न्यूयोर्क में 19 सितंबर को उन्हें हमारे ही देश की मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने यह अवार्ड दिया. जो यूनिसेफ की गुडविल एंबेसडर भी हैं.
कहां से हुई शुरुआत
लीड्स कॉलेज में पढ़ने के दौरान रिया अपने कोर्स के तीसरे साल में भारत आई. मकसद था acid attack survivor लड़कियों से मिलना और उनपर डॉक्यूमेंटरी बनाना.
मगर इसी दौरान उन्हें ऐसी चीजों का सामना करना पड़ा जिसने उन्हें जिंदगी का असली मकसद दे दिया. उन्होंने इन लडकियों के दर्द को समझते हुए ये ठान लिया कि वह किसी भी हालत में उन्हें उनके पैरों पर खड़ कर फिर से जीने की राह दिखाएंगी.
इस कोशिश को पूरा करने के लिए रिया ने अप्रैल 2014 में दिल्ली से एक नई मुहिम की शुरुआत की. जिसमें उन्होंने acid attack survivor के लिए अपनी एक संस्था ‘मेक लव नॉट स्केयर’ बनाई जो एसिड पीड़ितों की मदद करती है.
रिया अपनी इस संस्था के माध्यम से एसिड पीड़ितों की हर तरह से मदद करने की कोशिश करती हैं. वो उनकी मेडिकल और पढ़ाई की जरूरतों से लेकर उनके अदालती मामलों के निपटारे और उनको मुआवजा दिलाने तक में हर वक्त उनके साथ रहती हैं.
आत्मनिर्भर बनाने की है चाह
रिया ने acid attack पीडितों के विकास के लिए एक सेंटर भी खोला है, जहां पर वह पीड़ितों को वोकेशनल और स्किल ट्रेनिंग देती हैं.
इसके अलावा वह उनमें आत्मविश्वास लौटाने के लिए उनकी काउंसिलिंग भी करवाती हैं, ताकि पीड़िता समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें. इस सेंटर में लड़कियों को अंग्रेजी और कंप्यूटर की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है.
पढाई कराने के साथ ही रिया लड़कियों को उनके मनपसंद क्षेत्रों में आगे पढ़ने में सहायता भी करती हैं
रिया इन लोगों के लिए डांसिग, सिंगिंग, मेकअप वर्कशाप भी चलाती हैं. मेकअप आर्टिस्टों की मदद से वह एसिड पीड़ितों को यह भी सिखाती हैं कि कैसे अपने चेहरे को कवर करना है.
वर्तमान में देश की करीब 55 एसिड पीड़ित लड़कियां और महिलाएं रिया की संस्था से जुड़ी हैं, जिनकी उम्र 6 महीने से लेकर 65 साल तक के बीच है.
एसिड अटैक के सबसे ज्यादा मामले भारत में
वैसे तो महिलाओं पर एसिड फेंकने की घटनाएं पूरी दुनिया में होती है, लेकिन भारत में यह सबसे ज्यादा है.
प्रेमी को ठुकराए जाने या परिवार के ही किसी सदस्य से अनबन होने की स्थिति में ऐसी घटनाएं ज्यादातर सामने आती हैं. एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल करीब 1000 एसिड अटैक की घटनाएं होती है. इसकी मुख्य वजह है कि भारत में एसिड कम कीमत पर दुकानों पर आसानी से मिल जाता है.
दुनिया भर के कुल एसिड हमलों में से 80 फीसदी का निशाना महिलाएं होती है.
लंदन स्थित समाजसेवी संस्था एसिड सर्वाइवर ट्रस्ट इंटरनेशनल के अनुसार हर साल दुनिया भर में करीब 1,500 लोगों पर तेजाब का हमला होता है.