गोरखपुर- बच्चों की मौत का आकलन करने से पहले, इंसेफेलाइटिस के कहर को जानना जरूरी

demo pic
demo pic
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में महज 5 दिनों के अंदर 60 बच्चों की एकाएक मौत के मामले ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा कर दिया है. अभी तक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन मौतों की वजह बच्चों को दी जा रही ऑक्सीजन सप्लाई का ठप होना माना जा रहा है.
इन सब के बीच एक सावल यह भी उठ रहा है कि आखिर इन बच्चों को कौन सी बिमारी थी जिसके चलते इन्हे अस्पताल में ऑक्सीजन पर रखा गया था? आख़िर क्यों अब भी इस अस्पताल में भर्ती तमाम सीरियस मरीज़ों में बड़ी तादाद बच्चों की ही है?
इन सब सवालों का एक ही जवाब है इंसेफेलाइटिस. इस बिमारी ने हर साल की तरह इस बार भी गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल के बच्चों को अपने आगोश में ले लिया है.
क्या है इंसेफेलाइटिस?
मॉनसून के मौसम में जुलाई से अक्टूबर के महीने के दौरान ये बीमारी काफी सक्रीय रहती है. ये बीमारी एक खास किस्म के वायरस के शरीर के अंदर पनपने से होती है. जो ज्यादातर 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ही अपना शिकार बनाता है.
इस बिमारी को जापानी बुखार या दिमागी बुखार भी कहा जाता है.
आंकड़ों की मानें तो उत्तर प्रदेश ,असम, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और तामिलनाडु ये ऐसे पांच राज्य है जहां इस बिमारी ने लोगों को अत्यधिक प्रभावित किया है. एक रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 3 दशक में करीब 50 हजार से अधिक बच्चे इस बीमारी के शिकार हुए हैं. जिनमें ज्यादातर बच्चों की मौत हो गई है. 2014 में अकेले असम राज्य में ही 272 बच्चों की मौत हो चुकी है.
इंसेफेलाइटिस के लक्षण
इस बिमारी में रोगी को तेज बुखार,झटके,कुछ भी निगलने में कठिनाई होने लगती है. पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगता है. कमर और गर्दन अकड़ने लगती है.दिमाग के बाहरी हिस्से में सूजन भी आ जाती है जिससे मरीज को उल्टी,घबराहट,चक्कर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
कैसे करें बचाव
इस बीमारी से बचने के लिए मच्छरों और कीड़े मकोड़ो वाली जगहों पर कीटनाशक का छिड़काव करें. पानी जमा ना होने दे. बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाए. सोते समय मच्छरदानी जरूर लगाएं. वायरस के कारण होने वाली इस बिमारी से बचाव के लिए बच्चों को वैक्सीन का टिका जरूर लगवाएं.